ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में ‘नवरंग–शक्ति उत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ, पांच दिनों तक बिखरेंगे भारतीय संस्कृति और शक्ति के नौ रंग

कलश स्थापना, मां दुर्गा की आरती और भजन-कीर्तन के साथ शुरू हुआ उत्सव; कुमाऊंनी लोक संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से रूबरू होंगे विद्यार्थी

भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और कुमाऊंनी लोक परंपराओं को समर्पित पांच दिवसीय ‘नवरंग–शक्ति उत्सव 2026’ का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। 15 से 19 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उत्सव का आयोजन विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर कुमाऊंनी कल्चर एंड हेरिटेज द्वारा किया जा रहा है।ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में ‘नवरंग–शक्ति उत्सव 2026’ का शुभारंभ, शक्ति के नौ रंगों से सजेगा पांच दिवसीय आयोजन

उत्सव के पहले दिन विश्वविद्यालय परिसर में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर भीमताल परिसर के निदेशक ने पूजा-अर्चना कर ग्राफिक एरा परिवार सहित समस्त समाज की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके बाद मां दुर्गा की आरती, भजन-कीर्तन और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का स्मरण कर सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

कुमाऊंनी संस्कृति और पारंपरिक कला से सजा पूजा पंडाल

उत्सव के लिए विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया पूजा पंडाल कुमाऊंनी संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक शिल्प का आकर्षक उदाहरण बना। पंडाल को पारंपरिक पिछौड़ा, ऐपण कला, स्थानीय लोक आकृतियों, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं, फूलों और आम के पत्तों से बने तोरणों से सजाया गया। पारंपरिक सजावट ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और लोक जीवन की खूबसूरती को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

इस सजावट के माध्यम से विद्यार्थियों ने क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति अपनी रुचि और जुड़ाव प्रदर्शित किया। साथ ही प्रकृति के प्रति सम्मान, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले सांस्कृतिक ज्ञान के महत्व को भी रेखांकित किया गया। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के महत्व से परिचित कराना भी है।

दुर्गा सप्तशती पाठ और सुंदरकांड से गूंजेगा परिसर

पांच दिवसीय ‘नवरंग–शक्ति उत्सव’ के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके माध्यम से मां दुर्गा की महिमा, शक्ति, साहस और अधर्म पर धर्म की विजय के संदेश को प्रस्तुत किया जाएगा।

वहीं, 17 अक्टूबर को विशेष सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसमें श्रद्धालु सामूहिक रूप से शामिल होकर भक्ति, आस्था, सेवा और समर्पण के मूल्यों का अनुभव करेंगे। धार्मिक आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और जीवन में सकारात्मक विचारों के महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।

गरबा, गणेश वंदना और शक्ति के नौ स्वरूपों पर आधारित नृत्य-नाटिका होगी आकर्षण

उत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। गणेश वंदना, गरबा और शक्ति के नौ रंगों एवं दिव्य स्वरूपों को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक नृत्य-नाटिका कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, नारी शक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की विविधता को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

नवमी के अवसर पर कन्या पूजन का आयोजन भी किया जाएगा। यह आयोजन नारी शक्ति के सम्मान, श्रद्धा और समाज में महिलाओं के महत्व का संदेश देगा। उत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की सहभागिता के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

संस्कृति, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश देगा उत्सव

‘नवरंग–शक्ति उत्सव 2026’ भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं को समझने, उनका सम्मान करने और उन्हें भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

यह उत्सव मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निहित शक्ति, आत्मविश्वास, धैर्य और करुणा के महत्व को भी रेखांकित करता है। आयोजन का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के साथ समाज में सकारात्मक सोच, आपसी सद्भाव और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में आयोजित यह पांच दिवसीय उत्सव धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के बीच सार्थक समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

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