लालकुआं। बिंदुखत्ता को वनाधिकार अधिनियम के तहत राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। तहसील परिसर में चल रहा क्रमिक धरना-प्रदर्शन बुधवार को 12वें दिन भी जारी रहा।
धरने में शामिल ग्रामीणों ने सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबे समय से लंबित मामले पर जल्द निर्णय लेने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद शासन स्तर पर पत्रावली लंबित रहने से क्षेत्रवासियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर आयोजित सभा में वनाधिकार समिति के संरक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार श्याम सिंह रावत ने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का मामला स्थानीय ग्रामीणों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अफवाहें फैलाकर ग्रामीणों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वनाधिकार अधिनियम के तहत राजस्व गांव बनाने के लिए तैयार की गई पत्रावली में कोई कमी नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर ग्रामीण लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांग है कि सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय ले। आंदोलनकारियों ने कहा कि ग्रामीणों को आश्वासन देने के बजाय अब ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राजस्व गांव का दर्जा मिलने से जुड़ी मांग को लेकर क्षेत्र के लोग लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक अंतिम निर्णय नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि मामले में अनावश्यक देरी समाप्त कर पत्रावली पर जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
फैसला नहीं हुआ तो चुनाव में भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से मांग पूरी नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उसे इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे और जब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं होती, तब तक सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे।
मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, जल्द निर्णय लेने की मांग
धरना-प्रदर्शन के समापन पर अन्य दिनों की तरह तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में बिंदुखत्ता को वनाधिकार अधिनियम के तहत राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबित पत्रावली पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और वर्षों से लंबित इस मामले का जल्द समाधान निकालेगी। फिलहाल बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है और ग्रामीणों की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

