कंपनियों में निदेशक पद से हटाने के आरोपों और वायरल ऑडियो की भी होगी जांच, एसआईटी दस्तावेजों की सत्यता परखने के लिए ले सकती है एफएसएल की मदद

देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के बरेली में भी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शनिवार को पुलिस की एक टीम बरेली भेजी गई, जो गिरधारी लाल साहू के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमों से संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। चूंकि मंत्री की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे से जुड़ा घटनास्थल बरेली बताया गया है, इसलिए पुलिस वहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाकर मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

एसआईटी इस मामले में केवल मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने मुकदमों, कंपनियों में निदेशक पद से हटाए जाने की प्रक्रिया और इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कथित ऑडियो की सत्यता समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कंपनियों में निदेशक पद से हटाने के आरोपों की जांच

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि उनके पति गिरधारी लाल साहू ने कथित फर्जीवाड़ा कर उन्हें कुछ कंपनियों में निदेशक पद से हटा दिया। इस मामले में पुलिस संबंधित दस्तावेज जुटा चुकी है और अब उनकी जांच की जा रही है।

जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कंपनियों में निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई और क्या इसमें निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। इसके साथ ही दस्तावेजों की प्रमाणिकता, उनमें दर्ज जानकारियों और संबंधित प्रक्रियाओं की भी पड़ताल होगी।

पुलिस यह भी जांच करेगी कि दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़, गलत जानकारी या अन्य अनियमितता तो नहीं की गई। जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों की तकनीकी जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की मदद ली जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पुराने मुकदमों की भी खंगाली जा रही जानकारी

एसआईटी गिरधारी लाल साहू के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमों से संबंधित तथ्यों की भी जांच कर रही है। इसके लिए पुलिस टीम को बरेली भेजा गया है, जहां पुराने मामलों से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।

पुलिस इन मामलों से संबंधित जानकारी जुटाकर मौजूदा प्रकरण के तथ्यों से उसका मिलान करेगी। जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पहलुओं की जांच की जाएगी।

अस्पताल में भर्ती होने के कारण मंत्री के बयान नहीं हो सके दर्ज

मामले की जांच के तहत एसआईटी को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के बयान भी दर्ज करने हैं। हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने के कारण शनिवार शाम तक उनके बयान दर्ज नहीं किए जा सके थे।

एसआईटी अब रविवार को मंत्री के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। उनके बयान सामने आने के बाद आरोपों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को समझने और उपलब्ध दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों से उनका मिलान करने में मदद मिल सकती है।

जांच में संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस आरोपों की परिस्थितियों, दस्तावेजों में दर्ज जानकारियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एक साथ रखकर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।

वायरल ऑडियो की सत्यता भी जांच के दायरे में

रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद के दौरान इंटरनेट मीडिया पर एक कथित ऑडियो प्रसारित हुआ है। इसमें गिरधारी लाल साहू और एक महिला के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस ने इस ऑडियो की सत्यता की जांच भी शुरू कर दी है।

शनिवार तक यह ऑडियो पुलिस को आधिकारिक तौर पर मंत्री रेखा आर्या की ओर से प्राप्त नहीं हुआ था। ऐसे में पुलिस ऑडियो के स्रोत, मूल रिकॉर्डिंग की उपलब्धता और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल करेगी। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास होगा कि रिकॉर्डिंग वास्तविक है या नहीं और उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की पुष्टि कैसे की जा सकती है।

मंत्री रेखा आर्या ऑडियो को पूरी तरह सत्य बता चुकी हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से इसकी स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि होना अभी बाकी है। आवश्यकता पड़ने पर ऑडियो को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है, ताकि उसकी प्रामाणिकता से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।

एफएसएल की मदद से परखे जाएंगे महत्वपूर्ण साक्ष्य

पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणिकता और उनमें संभावित छेड़छाड़ की जांच के लिए एफएसएल की मदद लेने पर विचार कर रही है। तकनीकी जांच के जरिए दस्तावेजों और ऑडियो से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास किया जा सकता है।

एसआईटी फिलहाल बरेली से साक्ष्य जुटाने, कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने, पुराने मुकदमों के तथ्यों को खंगालने और कथित वायरल ऑडियो की सत्यता परखने में जुटी है। इन सभी पहलुओं की जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस के अनुसार, मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि कैबिनेट मंत्री की ओर से दर्ज मुकदमे से संबंधित घटनास्थल बरेली में होने के कारण वहां टीम भेजी गई है। टीम सभी पहलुओं की जांच करेगी। गिरधारी लाल साहू के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमों की भी पड़ताल कराई जा रही है। साक्ष्य जुटाने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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