IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की 36 घंटे की अनवरत भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

देशभर में 70 प्रतिशत से अधिक अधिकारी-कर्मचारी आंदोलन में शामिल, सरकार और LIC से निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग

हल्द्वानी। IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर आयोजित दो दिवसीय देशव्यापी भूख हड़ताल दूसरे दिन भी पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ जारी रही। हल्द्वानी के बुद्धा पार्क में बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने धरना देकर केंद्र सरकार के निजीकरण संबंधी फैसले का विरोध किया।

आंदोलन में शामिल बैंक कर्मियों का जोश और हौसला इस कदर बुलंद रहा कि उन्होंने कड़ाके की ठंड और रात की कठिन परिस्थितियों के बावजूद धरना स्थल नहीं छोड़ा। कर्मचारियों ने पूरी रात बुद्धा पार्क में ही बिताई और 36 घंटे की लगातार भूख हड़ताल जारी रखकर अपने विरोध को मजबूती से दर्ज कराया।

आंदोलनकारियों के अनुसार, देशभर में इस दो दिवसीय आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। IDBI बैंक के 70 प्रतिशत से अधिक अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल उनके रोजगार और सेवा संबंधी हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था और आम जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल रद्द करने की मांग

भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से IDBI बैंक की प्रस्तावित बिक्री प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग उठाई। आंदोलनकारियों ने M/s 10955230 Canada Inc. (Fairfax Financial Holding Ltd.) को बैंक की प्रस्तावित बिक्री पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक में सरकार और LIC की हिस्सेदारी कम होने से सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन

आंदोलन कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि संसद में वर्ष 2003 में दिए गए आश्वासन के अनुरूप IDBI बैंक में केंद्र सरकार और LIC की न्यूनतम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखी जानी चाहिए।

इसके साथ ही जमाकर्ताओं की जमा पूंजी की सुरक्षा के लिए सॉवरेन गारंटी (सरकारी संप्रभु गारंटी) सुनिश्चित करने और बैंक कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी योजनाओं तथा आरक्षण नीतियों को लेकर लिखित गारंटी देने की मांग की गई।

आंदोलन और व्यापक करने की चेतावनी

धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि IDBI बैंक को बचाने की लड़ाई केवल अधिकारियों और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह संसदीय जवाबदेही, सामाजिक न्याय और देश की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा से भी जुड़ी है। वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था आम जनता, छोटे व्यापारियों और जमाकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में बैंक के भविष्य को लेकर सभी संबंधित पक्षों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण की प्रक्रिया पर जल्द रोक लगाकर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

धरना स्थल पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर नारे लगाए— ‘IDBI बचाओ, सार्वजनिक बैंकिंग बचाओ’ और ‘संसदीय आश्वासन का सम्मान करो’।

इस दौरान United Forum of IDBI Officers & Employees, हल्द्वानी की ओर से आंदोलन को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

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