50 वर्षों से लंबित सड़कों के निर्माण का दावा, एक साल में 41 सड़कों को जोड़ने का प्रयास; ओखलकांडा के अधोड़ा क्षेत्र में 41वीं सड़क का निर्माण कार्य प्रगति पर
RSS-ABVP से संगठनात्मक सफर, गौसेवा से जनसेवा तक; अब भीमताल से भाजपा टिकट पर कमलेश भट्ट की नजर
भीमताल। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के संभावित दावेदार अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने लगे हैं।
इसी कड़ी में 57-भीमताल विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के लिए कमलेश भट्ट ने संगठन के सामने अपनी दावेदारी पेश कर राजनीतिक चर्चाओं को गति दे दी है।
कमलेश भट्ट ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का द्वितीय वर्ष प्रशिक्षण पूर्ण किया। इसके बाद वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और करीब 12 वर्षों तक संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।
इस दौरान उन्हें छात्र राजनीति, संगठन विस्तार और युवाओं के बीच काम करने का अनुभव प्राप्त हुआ।
वर्ष 2019 में उन्होंने कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशी के रूप में छात्रसंघ चुनाव भी लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने इसे अपने लिए सीख के रूप में लिया और संगठनात्मक गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों में अपनी सक्रियता जारी रखी।
कमलेश भट्ट ने गौसेवा को अपने सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड गौ सदन में सचिव के पद पर कार्यरत हैं और लंबे समय से गोवंश संरक्षण एवं सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनके अनुसार, भीमताल विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लावारिस घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही विधानसभा क्षेत्र के चारों विकासखंडों में चार गौशालाओं की स्थापना की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
सड़क निर्माण को बताया अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि, 41 सड़कों को लेकर किया दावा
भीमताल विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण और दूरस्थ गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के प्रयासों को कमलेश भट्ट ने अपनी दावेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने कहा कि भीमताल विधानसभा का भौगोलिक क्षेत्र काफी विस्तृत है। यहां ओखलकांडा, धारी, रामगढ़ और भीमताल के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि संगठन उन्हें जिम्मेदारी देता है तो वह इन समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देंगे।
फिलहाल भाजपा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में कमलेश भट्ट की दावेदारी ने 57-भीमताल विधानसभा सीट पर राजनीतिक समीकरणों और टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं को एक नया आयाम दे दिया है।
अब देखना होगा कि संगठन उनके संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक कार्यों और विकास संबंधी दावों को कितनी गंभीरता से लेता है और आगामी चुनाव में किस चेहरे पर भरोसा जताता है।

