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हल्द्वानी। प्राचीन  रामलीला मैदान में  विभीषण शरणागति रामेश्वरम स्थापना तथा सेतु बंध की लीला का मंचन कराया गया ।

विकास पुष्कर दत्त शास्त्री कहते हैं कि रावण ने जिस क्षण विभीषण को त्यागा, उसी क्षण वह अभागा वैभव (ऐश्वर्य) से हीन हो गया।

विभीषण हर्षित होकर मन में अनेकों मनोरथ करते हुए श्री रघुनाथजी के पास चले जाते हैं. भगवान राम विभीषण जी का अपने रामा दल में स्वागत करते हैं और गले मिलते हैं इसके पश्चात समुद्रतट पर भगवान शिव की स्तुति करते हुए रामेश्वरम की स्थापना की जाती है।

नल नील तथा वानरों सहित लंका पर चढ़ाई करने के लिए सेतु बंध का निर्माण किया जाता है।

मैदान में आज अमित जोशी, सुशील शर्मा तथा रोहित ठाकुर के द्वारा सेतुबंध की सुन्दर झांकी का निर्माण कराया गया

 संचालन समिति से विवेक कश्यप ,योगेश शर्मा, राजेन्द्र मुन्ना आदि ने अतिथियों का स्वागत किया . व्यास पूजन पूर्व ब्लॉक प्रमुख गोपाल नेगी , एन बी गुणबंत, बिंदेश गुप्ता ने किया।

श्री रामलीला मंचन में आज विभिन्न संस्थाओं ने सहयोग किया जिसमें लैइनेस क्लब उड़ान एवं उमंग, गोरखा सेवा समिति, अग्रवाल महिला समिति आदि रही।

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