वर्तमान में पूरे उत्तराखंड के माध्यमिक और इंटरमीडिएट कॉलेजों में बहुत कम संख्या में फुल- फ्लैश,प्रधानाध्यापक/ प्रधानाचार्य कार्यरत हैं।

अधिकांश स्कूल मुखिया विहीन हैं, जिनका संचालन वरिष्ठतम प्रवक्ता या वरिष्ठतम एल.टी. शिक्षक, प्रभारी प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के तौर पर कर रहे हैं।

लगभग चार-पांच वर्ष हो गए हैं,विद्यालयों में फुल- फ्लैश प्रधान नहीं आए हैं, ऐसी स्थिति में  जनपद नैनीताल के अनेक विद्यालयों में कई  शिक्षक साथी, वरिष्ठ प्रवक्ता और एल.टी., बड़े मनोयोग के साथ प्रभारी प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के पद का उत्तरदायित्व निर्वहन कर रहे हैं।

अपने विषय के शिक्षण के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक उत्तरदायित्व को संभालते हुए बड़ी मुस्तैदी के साथ इन हाई स्कूल /इंटरमीडिएट कॉलेजों का सफल संचालन कर रहे हैं।

जहां एक ओर इनमें से एक प्रभारी प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक अपनी हेकड़ी,पूर्वधारणा, जिद्दीपन और व्यक्तिगत दुर्भावना के कारण स्टाफ में उचित सामंजस्य नहीं कर पा रहे हैं, जिससे विद्यालय का परिणाम भी प्रभावित हो रहा है।

कई प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक अपने साथ के शिक्षकों के साथ रहने के बाद भी प्रभारी का पद प्राप्त होते ही अपने आप को उच्च अधिकारी समझकर अपने व्यवहार में परिवर्तन कर देते हैं, किंतु कुछ ऐसे शानदार प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक प्रभारी भी हैं।

जिनको वास्तव में दिल से शाबाशी देने को मन करता है।  जनपद नैनीताल के दूरस्थ स्थान पर स्थित विद्यालय राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज चौरलेख, विकासखंड -धारी, विद्यालय में विगत चार-पांच वर्षों से वरिष्ठ अंग्रेजी प्रवक्ता  हेमचंद्र जोशी, प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्य देख रहे हैं।

एक ऐसा व्यक्तित्व जो अपने पद की गरिमा को समझते हुए अपने सभी शिक्षक साथियों के साथ सच्चे मित्र की भांति सदैव खड़ा रहता है, सभी के सुख दुख का प्रथम सहयोगी है और स्टाफ एवं विद्यालय की कठिनाइयों के समक्ष अडिग चट्टान सा खड़ा हो जाता है।

विद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ में अत्यधिक लोकप्रिय और बच्चों के आदर्श प्रधानाचार्य  जोशी जी की कार्यकुशलता बेहतरीन है।

बड़े-बड़े जटिल उत्तरदायित्वों का खुशी-खुशी निर्वाह करते हुए बड़े मनोयोग के साथ प्रत्येक शिक्षक की व्यक्तिगत योग्यता का सम्मान करते हुए बखूबी विद्यालय चला रहे हैं।

किसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, किसकी काबिलियत से कैसे कार्य निकाला जाए, यह उन्हें बखूबीआता है।

सभी का साथ,सभी का सम्मान, सभी का विश्वास और सभी के हितार्थ काम करते हुए उत्तरोत्तर विद्यालय को प्रगति की ओर ले जा रहे हैं।

पूरा विद्यालय जिसमें करीब ढाई सौ से अधिक बच्चे हैं और 15-20 का स्टाफ है,एक आनंदालय के रूप में दृष्टिगोचर हो रहा है। बात तो तब सार्थक होती है।

जब बच्चे और शिक्षक एक स्वर में कहते हैं कि” सर! हमारे प्रधानाचार्य बहुत अच्छे हैं, उनके साथ काम करने के लिए हर वक्त हम दिल से तैयार रहते हैं”।साथी शिक्षक यह भी कहते हैं कि- “हमारे जैसा प्रधानाचार्य कहीं नहीं मिलेगा।

उनकी इतनी अच्छी कार्यशैली है कि मन करता है- कब सुबह हो और कब हम स्कूल जाएं”। एक कुशल प्रशासक के लिए इससे बढ़िया कमिटमेंट और क्या हो सकता है ?

यही एक कुशल शिक्षक और काबिल प्रधानाचार्य की योग्यता का पैमाना हो सकता है। आपकी इस अनुकरणीय कार्यशैली को नमन है।

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