हल्द्वानी के निजी अस्पताल में गंभीर मरीज के इलाज से जुड़ा मामला, शिकायत के बाद प्रशासन ने शुरू की जांच; तीमारदार ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
हल्द्वानी। आयुष्मान कार्ड के जरिए गरीब और जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बीच हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामला मुखानी रोड स्थित प्राइवेट अस्ताल जुड़ा बताया जा रहा है, जहां एक गंभीर मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज का भरोसा दिए जाने के बाद इलाज के दौरान पोर्टल नहीं चलने का हवाला देकर उनसे बड़ी रकम नकद जमा कराने के लिए कहा गया।
इसी प्राइवेट अस्पताल में कुछदनों पहले एक व्यक्तिक आंखों का इलाज करते वक्त जान चली गई थी।
उस समय भी मामला काफी तूल पकड़ा। लोगों ने काफी हंगामा भी किया। फिर भी बताया जा रहा है कि उक्त प्राइवेट अस्पताल के हौसले बुलंद हैं।
तीमारदार का आरोप है कि अस्पताल में मरीज को आयुष्मान योजना के तहत उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में कथित तौर पर “पोर्टल नहीं चल रहा है” कहकर इलाज के लिए लाखों रुपये की मांग की गई।
परिजनों के मुताबिक, आर्थिक रूप से परेशान होने के बावजूद उन्होंने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए रकम की व्यवस्था की।
मामले को लेकर जब तीमारदार की ओर से अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से शिकायत की गई तो मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा।
शिकायत के बाद उच्चस्तरीय जांच शुरू किए जाने की बात सामने आई है। जांच शुरू होते ही अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
तीमारदार का यह भी आरोप है कि शिकायत और जांच की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से फोन कर मामले को समाप्त करने तथा आपसी समझौते का प्रयास किया गया। इसी बातचीत से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर मामले को रफा-दफा करने को लेकर बातचीत सुनाई देती है।
मामले ने आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और इलाज के दौरान होने वाले भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और जांच में सामने आने वाले तथ्य इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट पर है।
यदि जांच में आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन या मरीज से अनधिकृत वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच जारी है।




























