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हल्द्वानी। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां किताबों, ड्रेस और यहां तक कि जूतों की खरीद के लिए अभिभावकों पर तय दुकानों से सामान लेने का दबाव बनाया जा रहा है। प्रशासनिक जांच में इस पूरे खेल का खुलासा होने के बाद अभिभावकों की परेशानियां सामने आ गई हैं।

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर खर्च का बोझ बढ़ गया है। स्कूलों द्वारा किताबें, कॉपियां, बैग और यूनिफॉर्म केवल चुनिंदा दुकानों से खरीदने के निर्देश दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, कई स्कूलों में एनसीईआरटी या सीबीएसई मानकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू की जा रही हैं, जिससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि स्कूल ड्रेस, बैग और अन्य सामान पर स्कूल का नाम छपा होने के कारण उनकी कीमतें भी काफी अधिक वसूली जा रही हैं। नैनीताल जिला में हुई प्रशासनिक जांच में स्कूलों और दुकानदारों की मिलीभगत की पुष्टि भी हुई है।

हालांकि, प्राइवेट स्कूल प्रबंधन ने किसी भी तरह के गठजोड़ से इनकार किया है। लेकिन अभिभावकों का कहना है कि हर साल फीस, किताबों और ड्रेस के नाम पर लगातार बढ़ता खर्च उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है।

इस बीच उत्तराखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फीस नियंत्रण और शैक्षिक नियमों को लागू कर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगानी जरूरी है, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।

फिलहाल, लंबे समय से फीस एक्ट और एजुकेशन एक्ट लागू करने की बात हो रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से अभिभावकों को हर साल इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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