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न दल, न संगठन: फुटपाथ बचाओ आंदोलन में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बने आवाज़

हल्द्वानी। फुटपाथ बचाओ आंदोलन के तहत आज बड़ी संख्या में नागरिक एकत्र हुए और शांतिपूर्ण ढंग से अपने विचार साझा किए।

आंदोलन की शुरुआत 21 दिसंबर 2025 को हुई थी, जिसके तहत प्रारंभिक दिनों में नियमित कार्यक्रम चले। 14वें दिन शाम को बुद्ध पार्क, टिकोनिया से एसडीएम कोर्ट तक कैंडल मार्च निकाला गया।

इसके बाद आंदोलन हर रविवार सुबह 11 से 1 बजे तक जारी है। आगामी दो सप्ताह बाद जन-रैली आयोजित करने का प्रस्ताव है; आगे की कार्ययोजना लोगों की भागीदारी के अनुसार तय की जाएगी।

नागरिकों ने दोहराया कि यह आंदोलन न सरकार, न सरकारी विभागों, न अमीर–गरीब के खिलाफ है।

उद्देश्य केवल यह है कि हल्द्वानी के नागरिकों को पैदल चलने के लिए सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ मिलें। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद तीन माह बीतने पर भी ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है।

आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा की जा रही छापेमारी से वे इनकार नहीं करते, लेकिन केवल छापे पुराना और अस्थायी समाधान हैं।

यह समस्या कई विभागों—नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पुलिस, आरटीओ, आईटी सहित अन्य—से जुड़ी है, इसलिए सभी विभागों की संयुक्त बैठक, स्पष्ट योजना और निश्चित समयसीमा जरूरी है।

नागरिकों ने हल्द्वानी नगर निगम ऐप का सुझाव भी रखा, जिससे अतिक्रमण पर स्थायी नियंत्रण, ट्रैफिक में राहत और नगर निगम के लिए राजस्व सृजन संभव बताया गया।

उन्होंने कहा कि जब नागरिक सहयोग को तैयार हैं, तो सरकार व संबंधित निकायों को इसे समयबद्ध ढंग से गंभीरता से लेना चाहिए।

आंदोलन में चौथी कक्षा के मास्टर तनिष कांडपाल के साथ महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और युवा भी शामिल हुए।

करीब 50 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें  भावना पांडे, मनोज कांडपाल, यतीश पंत, जीवन चंद्र पंतोलिया, भगवान राणा, जितेंद्र सिंह (सनीजी), अधिवक्ता संजय राठौड़, भुवन चंद्र जोशी, विनोज शाही, के.एन. तिवारी, गिरीश भट्ट, कुबेर मनराल सहित अन्य नागरिक मौजूद रहे।

नागरिकों ने चेताया कि यदि समयबद्ध दिशा और निर्णय नहीं मिले, तो यह शांतिपूर्ण आंदोलन आगे चलकर बड़ी जन-रैलियों व अन्य लोकतांत्रिक तरीकों में बदलेगा; अंतिम विकल्प के रूप में न्यायालय भी रहेगा।

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