हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहे इंतजार को समाप्त कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसरों और संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की तिथि घोषित कर दी है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर 2026 को छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान कराया जाएगा, जबकि 1 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय छात्र महासंघ का निर्वाचन संपन्न होगा।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव की तिथि को लेकर कुमाऊं विश्वविद्यालय, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय टिहरी के कुलपतियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में विचार-विमर्श के बाद तीनों विश्वविद्यालयों से जुड़े परिसरों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया को लेकर निर्णय लिया गया।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में चुनाव की तारीख घोषित होते ही हल्द्वानी, नैनीताल समेत कुमाऊं मंडल के विभिन्न कॉलेज परिसरों में चुनावी सरगर्मियां तेज होने की संभावना है। लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव की घोषणा का इंतजार कर रहे छात्र संगठनों और संभावित प्रत्याशियों में भी अब गतिविधियां बढ़ेंगी।
चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद छात्र संगठन अपने-अपने संभावित प्रत्याशियों के चयन, प्रचार-प्रसार और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटेंगे। कॉलेज परिसरों में छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज होंगी और विभिन्न छात्र संगठन अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय दिखाई देंगे।
छात्रसंघ चुनाव को छात्र राजनीति की महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलता है, जो कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर छात्र हितों तथा विभिन्न समस्याओं को प्रशासन के समक्ष उठाते हैं। ऐसे में चुनाव की घोषणा के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ने के साथ-साथ छात्र नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरण भी बनने शुरू हो जाएंगे।
29 सितंबर को होने वाले मतदान के बाद विभिन्न पदों के लिए चुने गए छात्र प्रतिनिधि अपने-अपने महाविद्यालयों और परिसरों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि 1 अक्टूबर को होने वाले विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के निर्वाचन पर भी सभी की निगाहें रहेंगी।
अब चुनावी तिथियों की घोषणा के साथ ही कुमाऊं विश्वविद्यालय और संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों के परिसरों में आने वाले दिनों में छात्र राजनीति पूरी तरह से गर्माने की संभावना है। छात्र संगठन जहां अपनी ताकत दिखाने की तैयारी करेंगे, वहीं संभावित प्रत्याशी छात्रों के बीच पहुंच बनाकर समर्थन जुटाने में जुटेंगे।




