उत्तराखंड में बिजली के करंट से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा

डेढ़ महीने में करंट लगने की तीन अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौतें 

ऋषिकेश। ऋषिकेश और मुनिकीरेती क्षेत्र में बिजली के करंट से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले करीब डेढ़ महीने में करंट लगने की तीन अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है।

लगातार हो रहे हादसों के बाद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की कार्यशैली और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और मृतकों के स्वजनों ने कई मामलों में बिजली लाइनों की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

लगातार हो रही घटनाओं के बाद क्षेत्र में लोगों का आक्रोश भी सामने आया है। विरोध और शिकायतों के बीच यूपीसीएल के दो एसडीओ स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर चुकी है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से ऋषिकेश में तैनात रहे दो एसडीओ का तबादला भी किया गया है।

मुनिकीरेती में करंट से गई थी एक जान

करीब एक महीने पहले मुनिकीरेती क्षेत्र में बिजली की चपेट में आने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्रवासियों में आक्रोश फैल गया था। लोगों ने यूपीसीएल के एसडीओ के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हादसे के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों की कथित उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया था।

स्थानीय लोगों का कहना था कि बिजली व्यवस्था से जुड़े कार्यों में सुरक्षा मानकों का गंभीरता से पालन किया जाना चाहिए, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त सतर्कता नहीं बरत रहे हैं।

संविदा लाइनमैन प्रदीप की मौत ने भी खड़े किए सवाल

करीब 17 दिन पहले काले की ढाल निवासी प्रदीप की भी बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। प्रदीप यूपीसीएल में संविदा पर लाइनमैन के रूप में कार्यरत था। हादसे के बाद स्वजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रदीप को चालू लाइन पर भेजा गया था।

स्वजनों के मुताबिक प्रदीप पहले भी करंट लगने से झुलस चुका था। इसके बावजूद उसकी सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। परिजनों ने यूपीसीएल अधिकारियों पर कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। इस घटना ने विभाग में फील्ड कर्मचारियों को काम के दौरान उपलब्ध कराए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों और बिजली लाइन बंद किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।

खदरी में मां-बच्ची की मौत से फिर मचा हड़कंप

अब रविवार देर शाम खदरी क्षेत्र में बिजली की टूटी तार की चपेट में आने से मां और बच्ची की मौत की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। हादसे के बाद एक बार फिर यूपीसीएल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

टूटी बिजली की तार का समय रहते संज्ञान नहीं लिया जाना और उसकी चपेट में आकर दो जिंदगियों का खत्म हो जाना बिजली व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और वे बिजली लाइनों की नियमित जांच तथा जर्जर और क्षतिग्रस्त तारों को तत्काल बदलने की मांग कर रहे हैं।

डेढ़ महीने में चार मौतों ने बढ़ाई चिंता

ऋषिकेश-मुनिकीरेती क्षेत्र में कम समय के भीतर करंट लगने से चार लोगों की मौत होना सामान्य घटना नहीं है। एक ओर आम लोग बिजली की टूटी और खुली तारों से खतरे में हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में लोगों की मांग है कि यूपीसीएल केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही बिजली लाइनों और उपकरणों की नियमित जांच करे।

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूपीसीएल हादसों की वास्तविक वजहों की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या नहीं। साथ ही, भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए विभाग की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी क्षेत्रवासियों की नजर है।

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