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आशा कार्यकर्ताओं ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर दिया धरना, सीएम को ज्ञापन सौंपकर मांगें पूरी करने की अपील, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

 रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को नैनीताल में आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन लागू करने, नियमित कर्मचारी का दर्जा देने, पेंशन की व्यवस्था करने और पूर्व में किए गए मानदेय बढ़ोतरी के वादे को लागू करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने, टीकाकरण, पल्स पोलियो, डेंगू समेत विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि आशा कार्यकर्ता लगातार स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों और योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने का काम कर रही हैं। इसके बावजूद उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने सरकार से आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन देने के साथ कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।

मानदेय बढ़ाकर 11,500 रुपये करने की मांग

ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से पूर्व में किए गए वादे के अनुसार मासिक मानदेय बढ़ाकर 11,500 रुपये करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। आशाओं ने मांग की कि उन्हें सेवानिवृत्ति तक राज्य सरकार की ओर से नियमित मासिक मानदेय दिया जाए।

इसके साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य पेंशन लागू करने और रिटायरमेंट के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की मांग भी उठाई गई।

प्रोत्साहन राशि हर माह देने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई अभियानों में काम करने के बावजूद प्रोत्साहन राशि कई-कई महीने तक लंबित रहती है। ऐसे में अभियान आधारित प्रोत्साहन का भुगतान हर माह सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

ज्ञापन में डेंगू और पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान करने की मांग भी शामिल है।

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग

आशा कार्यकर्ताओं ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने और मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केवल आशा कार्यकर्ताओं से काम लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसके अलावा नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) का बजट बढ़ाने तथा एनएचएम के तहत कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की गई।

छंटनी की कोशिश बंद करने की चेतावनी

यूनियन ने मानदेय अथवा अन्य कारणों के नाम पर आशा कार्यकर्ताओं की छंटनी की कोशिश बंद करने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग के अभियानों को सफल बनाने में लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, इसलिए उनके रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ता आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई* नहीं की जाती।

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