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भीमताल। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), भीमताल में नशा-मुक्ति जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को नशे और मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ ही नशे की रोकथाम, सहपाठी दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और नशा-मुक्त वातावरण के निर्माण के लिए संवेदनशील बनाना रहा।

यह कार्यक्रम डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड अकादमी प्रशासन, नैनीताल द्वारा राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अकादमी के महानिदेशक के प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में किया गया। इसमें कुल 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान पाठ्यक्रम निदेशक सुश्री रागिनी तिवारी ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने NISD के सहयोग से अकादमी द्वारा संचालित नशा-मुक्ति जागरूकता संबंधी विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को नशे के खिलाफ जागरूक रहने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों को नशे से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कुमाऊं विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. किरण तिवारी ने नशे एवं मादक पदार्थों के सेवन के प्रमुख कारणों तथा इससे होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से सहपाठी दबाव (Peer Pressure), मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सहपाठी सहयोग और नशे की रोकथाम में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने नशे की रोकथाम और नशा-मुक्त वातावरण निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर ग्रुप वर्क एवं प्रस्तुतिकरण में उत्साहपूर्वक भाग लिया। समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने नशे के कारणों, इसके दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर DIET भीमताल के प्राचार्य  सुरेश आर्या ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अकादमी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से बचाने और उनमें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रोग्राम निदेशक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों की भावी भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को समाज में नशा-मुक्ति का संदेश आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित करना है।

कार्यक्रम के समन्वय में  रेखा तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए नशे की रोकथाम और नशा-मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

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