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हल्द्वानी। उत्तराखंड में शिक्षा सत्याग्रह की शुरुआत आज अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए की गई। सत्याग्रह का उद्देश्य राज्य में शिक्षा अधिनियम (करेन मेयर हिल्टन एजुकेशन एक्ट या समकक्ष) को प्रभावी रूप से लागू करवाना है, जो पहले से अस्तित्व में होने के बावजूद ज़मीन पर लागू नहीं हो पाया है।

सत्याग्रह से जुड़े लोगों ने कहा कि शिक्षा संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है और वर्तमान में 65 प्रतिशत से अधिक छात्र निजी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, लेकिन निजी स्कूलों के लिए फीस, यूनिफॉर्म, किताबों, सहायक सामग्री तथा शिक्षकों के वेतन, कार्य समय और सेवा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस और प्रभावी नियम व्यवस्था नहीं है।

इसी कारण अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि इस समस्या का समाधान केवल शिक्षा अधिनियम के सख़्त और प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है। आवश्यकतानुसार इसमें कुछ संशोधन कर सभी हितधारकों को संरक्षण दिया जा सकता है।

सत्याग्रहकर्ताओं ने अपील की कि जिस प्रकार दिल्ली में शिक्षा से जुड़े क़ानूनों को प्रभावी बनाया गया है, उसी तरह उत्तराखंड देश का पहला अग्रणी राज्य बन सकता है, क्योंकि यहाँ पहले से शिक्षा अधिनियम मौजूद है।

गणतंत्र दिवस से एक दिन पूर्व सत्याग्रह शुरू करने के पीछे प्रतीकात्मक कारण बताते हुए कहा गया कि भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू हुआ, जबकि उसका निर्माण पहले हो चुका था। उसी भावना के साथ यह संदेश दिया जा रहा है कि शिक्षा अधिनियम भी अब तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

यह सत्याग्रह शांतिपूर्ण है और केवल शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, न्यायपूर्ण और संतुलित बनाने की माँग करता है।

जितेंद्र रौतेला, भगवंत सिंह, गौरव गोस्वामी, गिरीश भट्ट शामिल थे।

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