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पुलिस विभाग में तबादले सामान्य प्रक्रिया माने जाते हैं, लेकिन रामपुर पुलिस लाइन में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब विद्या सागर मिश्र को विदाई दी जा रही थी।

11वीं वाहिनी पीएसी, सीतापुर में सेनानायक पद पर ट्रांसफर होने जा रहे एसपी मिश्र की विदाई के दौरान कई महिला पुलिसकर्मी अपने आंसू नहीं रोक सकीं।

फेयरवेल कार्यक्रम में जैसे ही एसपी मिश्र मंच पर पहुंचे, माहौल गमगीन हो गया। करीब डेढ़ साल तक जिले की कमान संभालने वाले मिश्र अपने साथियों को संबोधित करते हुए खुद भी भावुक हो गए।

सबसे मार्मिक पल तब आया जब महिला सिपाहियों ने उन्हें घेर लिया और एक सिपाही ने रुंधे गले से कहा, “सर… मत जाइए।” इस पर एसपी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अरे… आता रहूंगा,” लेकिन यह आश्वासन भी सिपाहियों के आंसू नहीं रोक सका।

इस दौरान एसपी मिश्र ने एक रोती हुई सिपाही के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “रोते नहीं बेटा,” और अन्य सिपाहियों को भी ढांढस बंधाया। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।

बता दें कि विद्या सागर मिश्र मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल थे। सीमित संसाधनों में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कोलकाता से स्नातक और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। खाकी पहनने के जुनून के चलते उन्होंने दो सरकारी नौकरियां ठुकरा दीं और 1993 में पीपीएस में चयनित हुए। वर्ष 2015 में प्रमोशन के बाद वे आईपीएस बने।

एक सख्त और बेदाग छवि वाले अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले मिश्र के नाम 45 से अधिक एनकाउंटर दर्ज हैं। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान अपने जूनियर्स के प्रति अपनापन और परिवार जैसा व्यवहार रहा है। यही कारण है कि उनकी विदाई के दौरान पूरी पुलिस टीम भावुक नजर आई।

उनके स्थान पर अब 2017 बैच के आईपीएस सोमेंद्र मीणा ने रामपुर के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।

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