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उत्तराखंड में बढ़ रहे कैंसर के मामलों और खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर विधानसभा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में खाद्य पदार्थों में मिलावट और उनमें मौजूद हानिकारक रसायनों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार उन रसायनों को चिन्हित करने के लिए नई नियमावली तैयार करेगी, जो खाद्य पदार्थों में मिलावट के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रदेशभर में नियमित जांच अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभी तक त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की ओर से निरीक्षण और सैंपल लेने की कार्रवाई अधिक होती थी, लेकिन अब इसे नियमित प्रक्रिया बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत हर महीने एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर बाजारों, दुकानों और प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर उनकी जांच की जाएगी।

विधानसभा में भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मिलावट रोकने के लिए सालभर सख्ती जरूरी है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने सहमति जताते हुए कहा कि सरकार जांच व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगने वाले हॉट बाजारों में भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी, क्योंकि इन बाजारों में बड़ी संख्या में लोग स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं।

खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच को तेज बनाने के लिए देहरादून में अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है, जो 31 मार्च 2026 तक तैयार हो जाएगी। इसके शुरू होने से जांच प्रक्रिया तेज होगी और रिपोर्ट कम समय में मिल सकेगी।

इसके अलावा खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को मजबूत करने के लिए 28 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती का प्रस्ताव लोक सेवा आयोग को भेजा गया है। जब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों की तैनाती करने पर भी विचार किया जा रहा है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान कुल 3311 खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से 330 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे।

ऐसे मामलों में संबंधित निर्माता और विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि नियमित जांच और सख्त नियमों से खाद्य मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

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