गोल्ज्यू देवता के पूजन से हुआ शुभारंभ, लोकगीत-लोकनृत्य प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां

हल्द्वानी। हीरानगर स्थित पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में रविवार को पांच दिवसीय हरेला मेले का भव्य शुभारंभ गोल्ज्यू देवता के पूजन के साथ हुआ। मेले में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, संस्कृति प्रेमी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मेले का उद्घाटन मंच के संरक्षक एवं राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर तथा मंच अध्यक्ष खड़ग सिंह बगड़वाल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, हरियाली संवर्धन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण उत्सव है। उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात में हरेला पर्व की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है और आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।

उद्घाटन समारोह के बाद बच्चों की एकल लोकगीत एवं समूह लोकनृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या मेले का मुख्य आकर्षण रही। लोकगायिका बबीता देवी ने कुमाऊंनी भजनों और लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति देकर श्रद्धा और संस्कृति का रंग बिखेरा, वहीं लोकगायक पुष्कर मेहरा ने अपने लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया।

आयोजकों ने बताया कि पांच दिवसीय हरेला मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न आयोजन किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।

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