रानीबाग-ज्योलिकोट एनएच की बदहाली पर ग्रामीणों का आक्रोश, एनएच कार्यालय में तालाबंदी
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की सभी सड़कों को 15 अक्टूबर तक गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन रानीबाग से ज्योलिकोट को जोड़ने वाले मुख्य एनएच की बदहाल स्थिति इन निर्देशों के अनुपालन पर सवाल खड़े कर रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग की खराब हालत के चलते दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है।
रानीबाग-ज्योलिकोट मार्ग हल्द्वानी, नैनीताल और पहाड़ों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस मार्ग पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक और अन्य वाहन भी आवाजाही करते हैं। सप्ताहांत के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ने पर सड़क की खराब स्थिति के कारण जाम की समस्या भी सामने आती है।
सड़क की बदहाल स्थिति से नाराज क्षेत्र के ग्रामीण सोमवार को भाजपा नेता सचिन शाह के नेतृत्व में एनएच कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने कार्यालय के बाहर सड़क की दुर्दशा को लेकर नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में तालाबंदी कर विरोध जताया।
इस दौरान भाजपा नेता सचिन शाह ने दूरभाष के माध्यम से अधीक्षण अभियंता से बातचीत कर सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने मार्ग पर बने गड्ढों को तत्काल भरने और मुख्यमंत्री के निर्धारित निर्देशों के अनुरूप समय सीमा के भीतर सड़क को गड्ढा मुक्त करने की मांग की।
सचिन शाह ने कहा कि रानीबाग-ज्योलिकोट मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सड़क खराब होने से स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ पर्यटकों, व्यापारियों और रोजाना आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क की हालत में जल्द सुधार नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जनता के साथ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढों के कारण खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। रात के समय और बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने एनएच विभाग से महज खानापूर्ति के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर रानीबाग-ज्योलिकोट मार्ग की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और गड्ढों को नहीं भरा गया, तो क्षेत्रीय ग्रामीण व्यापक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।

