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नीट पीजी कटऑफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तीसरे दौर की काउंसलिंग में स्टेट सिलेक्शन कमेटी ने 800 में से सिर्फ 9 अंक पाने वाले एक डॉक्टर को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीट अलॉट कर दी। यह सीट मैनेजमेंट कोटे के तहत दी गई है।

इस खुलासे के बाद मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले काउंसलिंग राउंड में इससे भी कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को सीट मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

नीट पीजी सीटों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन समेत कई डॉक्टर संगठनों ने इस प्रक्रिया को गलत प्रैक्टिस करार दिया है। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।

तमिलनाडु के तीसरे राउंड की काउंसलिंग में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। पेरम्बलुर स्थित धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज में एमडी फार्माकोलॉजी की सीट 9 अंकों पर अलॉट की गई, जबकि इसी कॉलेज में 25 अंक पाने वाले उम्मीदवार को एमडी कम्युनिटी मेडिसिन की सीट दी गई। कुल 21 ऐसे उम्मीदवार पाए गए, जिन्हें 100 से कम अंकों पर पीजी सीटें मिल गईं।

बताया गया है कि 9 हजार से अधिक सीटें खाली रहने के बाद नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कटऑफ में बड़ी कटौती की थी। कटऑफ घटाकर 800 में से 103 अंक कर दिया गया, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए क्वालीफाइंग स्कोर माइनस में चला गया।

गौरतलब है कि नीट पीजी परीक्षा एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा में दाखिले के लिए आयोजित की जाती है, जिसे हर साल लाखों डॉक्टर देते हैं। ऐसे में बेहद कम अंकों पर सीट आवंटन ने मेडिकल पढ़ाई की गुणवत्ता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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