नेपाल त्रासदी में अब भी 583 पर्यटक लापता, 315 बचाए गए; पर्यटन बोर्ड की साइट पर जारी की गई सूचना
नेपाल में विनाशकारी आपदा के बीच भारत का बड़ा मानवीय सहयोग: 5वीं राहत उड़ान पहुंची, 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम और 5.5 टन जीवनरक्षक दवाएं भेजीं
काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। इस बीच भारत ने पड़ोसी देश नेपाल की सहायता के लिए अपने मानवीय प्रयासों को और तेज कर दिया है। भारत की ओर से लगातार राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और विशेषज्ञ बचाव दल भेजे जा रहे हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने नेपाल के लिए अपनी 5वीं राहत उड़ान रवाना की है। इस विशेष राहत विमान में 11 सदस्यीय विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, आधुनिक बचाव उपकरण और करीब 5.5 टन आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं एवं चिकित्सा सामग्री भेजी गई हैं।
भारत की इस मानवीय सहायता का उद्देश्य नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों में चल रहे खोज एवं बचाव अभियानों को मजबूती देना और जरूरतमंद लोगों तक जल्द से जल्द चिकित्सा एवं राहत सुविधाएं पहुंचाना है।
लापता लोगों की तलाश और फंसे नागरिकों को निकालना सरकार की पहली प्राथमिकता
नेपाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री के अनुसार, नेपाल सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश करना, दुर्गम और जोखिम वाले इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना तथा प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान लगातार चलाया जा रहा है और सहायता कार्यों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा। बाढ़ और अन्य आपदा प्रभावित नेपाली नागरिकों के साथ-साथ नेपाल में फंसे विदेशी नागरिकों को भी आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार, सेना, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, संचार सेवाओं के बाधित होने और कई स्थानों पर पहुंच मार्ग प्रभावित होने के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
सुरंगों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों के लिए विशेष अभियान
आपदा के बाद सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां उन क्षेत्रों में बनी हुई हैं, जहां महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं, भूमिगत सुरंगें और तकनीकी निर्माण स्थल स्थित हैं। इन स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना राहत एजेंसियों के लिए बेहद जटिल कार्य बना हुआ है।
इन चुनौतीपूर्ण अभियानों को सफल बनाने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं। ये विशेषज्ञ टीमें नेपाली सेना और अन्य बचाव एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं और भूमिगत सुरंगों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
अत्यधिक जोखिम वाले इलाकों में आधुनिक तकनीक, विशेष उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की तकनीकी क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर बचाव कार्य बेहद सावधानी के साथ चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
अब तक केवल 95 शवों की हो सकी पहचान
इस विनाशकारी आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मृतकों की पहचान भी प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब तक बरामद शवों में से केवल 95 शवों की पहचान हो सकी है, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के अनुसार, जिन शवों की पहचान फिलहाल नहीं हो पा रही है, उनके डीएनए सैंपल और अन्य आवश्यक कानूनी साक्ष्य सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि भविष्य में वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी पहचान की जा सके।
सेना और पुलिस बलों की सहायता से वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप शवों का प्रबंधन किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी अज्ञात शव से संबंधित साक्ष्य और नमूनों को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
संचार व्यवस्था ठप होने पर युवाओं ने संभाली जिम्मेदारी
आपदा के कारण कई क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे कठिन समय में स्थानीय युवाओं की एक अनोखी पहल लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।
बिदुर क्षेत्र में स्थानीय युवाओं ने ‘यूथ इनिशिएटिव’ के तहत एक अस्थायी राहत एवं संपर्क केंद्र स्थापित किया है। रोशन और शुगम समेत कई स्वयंसेवक इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इस राहत केंद्र में सोलर पावर की व्यवस्था, कीपैड फोन और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध कराए गए हैं। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे लोग यहां से अपने परिवार और परिचितों से संपर्क स्थापित कर पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहल विशेष रूप से उन परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है, जिनका आपदा के बाद अपने परिजनों से संपर्क टूट गया था।
भारत की मदद से राहत अभियान को मिली नई ताकत
नेपाल में आपदा के बाद भारत लगातार मानवीय सहायता पहुंचाने में जुटा हुआ है। पांचवीं राहत उड़ान के साथ विशेषज्ञ बचाव दल, आधुनिक उपकरण और बड़ी मात्रा में जीवनरक्षक दवाएं भेजे जाने से प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।
नेपाल में फिलहाल सेना, पुलिस, प्रशासन, स्थानीय स्वयंसेवकों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचना, लापता लोगों की तलाश करना और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
आपदा के इस कठिन दौर में भारत समेत अन्य देशों की ओर से मिल रही सहायता को नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रभावित इलाकों में हर गुजरते दिन के साथ खोज, बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास की जरूरत बढ़ती जा रही है।










