नैनीताल बार एसोसिएशन की बैठक में उठी आवाज—‘पहाड़ से संस्थान हटेंगे तो पलायन कैसे रुकेगा’, 2200 करोड़ की लागत और जंगल कटान पर भी जताई चिंता
नैनीताल। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं के बीच विरोध तेज हो गया है।
गुरुवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित बैठक में उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यदि पहाड़ से लगातार संस्थानों को मैदान की ओर स्थानांतरित किया जाएगा तो पहाड़ के अस्तित्व और विकास का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
उनका कहना था कि अलग उत्तराखंड राज्य की मांग इसलिए की गई थी ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और न्यायिक संस्थानों का विकास हो, लेकिन इसके विपरीत अब बचे हुए महत्वपूर्ण संस्थानों को भी पहाड़ से हटाने की तैयारी की जा रही है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान मेडिकल कॉलेज, रिसर्च संस्थान और उद्योगों की स्थापना जैसे बड़े वादे किए गए थे, लेकिन वे पूरे नहीं हुए। अब यदि हाईकोर्ट भी नैनीताल से स्थानांतरित किया जाता है तो इससे पलायन को और बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में कुछ अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट को नैनीताल से बाहर ले जाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें कुछ लोग और हाईकोर्ट प्रशासन भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि जिन्हें मैदान में कार्य करना है, वे वहां मौजूद अन्य न्यायालयों में जा सकते हैं, लेकिन नैनीताल से हाईकोर्ट हटाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित शिफ्टिंग की लागत पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि हाईकोर्ट स्थानांतरण पर करीब 2200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका बोझ अंततः प्रदेश की जनता पर पड़ेगा।
साथ ही नए परिसर के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की आशंका भी जताई गई। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह फैसला पर्यावरण और जनहित—दोनों के खिलाफ होगा।
अधिवक्ताओं ने मांग की कि हाईकोर्ट के स्थानांतरण की बहस में उलझने के बजाय वर्षों से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना था कि 26 वर्षों से लंबित मुकदमों के निपटारे को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बैठक के अंत में अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट शिफ्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो इसके खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए नैनीताल में ही हाईकोर्ट को बनाए रखने की मांग की।


