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पिता ने तीन बेटियोंको पढ़ा लिखा कर बनाया टीचर,पिता के निधन की सूचना तीनों को देने के बावजूद बेटीयों ने आने से किया इन्कार 

वृद्धाश्रम के संचालकों और कर्मचारियों ने ही परिवार की भूमिका निभाते हुए पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ किया अंतिम संस्कार

सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव ककरोई के रहने वाले अपने समय के प्रसिद्ध कपड़ा कारोबारी शिवचरण गुप्ता (71) का निधन एक ऐसी कहानी छोड़ गया, जिसने समाज को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया।

कभी संपन्न और सम्मानित कारोबारी रहे शिवचरण गुप्ता ने अपने जीवन के अंतिम कई वर्ष वृद्धाश्रम में गुमनामी के बीच बिताए और मंगलवार को वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

मानवता के प्रति अपनी संवेदनशील सोच का परिचय देते हुए शिवचरण गुप्ता ने जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प लिया था। निधन के बाद उनके नेत्र दान किए गए, जिससे दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी मिलने का अवसर मिला। हालांकि, उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी घटना ने सभी को भावुक कर दिया।

आनंदाश्रम के संचालक के अनुसार, शिवचरण गुप्ता की तीनों बेटियां शिक्षक हैं और नेपाल, मुंबई तथा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं।

पिता के निधन की सूचना तीनों को तत्काल दी गई, लेकिन किसी ने भी अंतिम संस्कार में शामिल होने की सहमति नहीं दी। बताया गया कि तीनों ने आने से इनकार कर दिया।

इसके बाद वृद्धाश्रम के संचालकों और कर्मचारियों ने ही परिवार की भूमिका निभाते हुए पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि शिवचरण गुप्ता पिछले कई वर्षों से यहीं रह रहे थे और आश्रम ही उनका परिवार बन चुका था।

यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े करती है। एक ओर जहां शिवचरण गुप्ता अपने नेत्रदान के माध्यम से दो लोगों के जीवन में उजाला छोड़ गए, वहीं दूसरी ओर अपनों की बेरुखी ने रिश्तों की बदलती तस्वीर को भी उजागर कर दिया।

उनकी विदाई ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भौतिक उपलब्धियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान, साथ और संवेदनशीलता है।

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