हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया और विषयवार सीटों को लेकर छात्रों का आक्रोश गुरुवार को सड़क पर दिखाई दिया। छात्र नेता मेहुल शाह के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका और कुमाऊं विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की ओर से बार-बार रजिस्ट्रेशन की तिथियां बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन कॉलेज पहुंचने के बाद विद्यार्थियों को उनकी पसंद के प्रमुख विषयों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इससे बड़ी संख्या में छात्र अपने भविष्य और करियर को लेकर असमंजस में हैं।
छात्र नेता मेहुल शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोल रहा है और प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को अवसर दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जब छात्र कॉलेज पहुंच रहे हैं तो उन्हें उनकी पसंद के विषयों में सीटें उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि इतिहास, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में विद्यार्थियों की सबसे अधिक रुचि है, क्योंकि इन विषयों का जुड़ाव आगे प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न करियर विकल्पों से भी है। इसके बावजूद सीटें सीमित होने के कारण विद्यार्थियों को इन विषयों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।
मेहुल शाह ने कहा कि छात्रों की मांग है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण और अधिक मांग वाले विषयों में सीटों की संख्या बढ़ाए, ताकि प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की योजनाओं के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय को यह तीसरा ज्ञापन दिया जाएगा। यदि कॉलेज स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो छात्र विश्वविद्यालय जाकर भी अपनी आवाज उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी प्रवेश की उम्मीद में कॉलेज पहुंच रहे हैं, लेकिन पसंदीदा विषयों में सीटें पूरी होने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि केवल दूसरे विषयों में प्रवेश लेने की सलाह देना उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
प्राचार्य ने बताया—राजनीति विज्ञान और इतिहास की सीटें भर चुकीं
वहीं, एमबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य एनएस बनकोटी ने छात्रों की मांग पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राजनीति विज्ञान और इतिहास विषय में कॉलेज के लिए पहले से निर्धारित सीटें भर चुकी हैं। ऐसे में इन विषयों में फिलहाल नए विद्यार्थियों को प्रवेश देना संभव नहीं है। हालांकि विद्यार्थियों को इन विषयों को माइनर विषय के रूप में चुनने का विकल्प दिया जा रहा है।
प्राचार्य ने बताया कि कॉलेज में अन्य कई विषयों में अभी सीटें रिक्त हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को उपलब्ध सीटों वाले विषयों में प्रवेश लेने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक प्रवेश अपने स्तर से नहीं दे सकता, क्योंकि विषयवार सीटों की संख्या विश्वविद्यालय स्तर पर स्वीकृत होती है।
50 प्रतिशत सीट बढ़ाने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय को भेजा
प्राचार्य एनएस बनकोटी ने बताया कि कॉलेज की ओर से पूर्व में स्वीकृत सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर विश्वविद्यालय को भेजा जा चुका है। अब यह प्रस्ताव राज्यपाल स्तर पर स्वीकृति के लिए लंबित है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और सीटों में वृद्धि की अनुमति मिलती है तो विद्यार्थियों को अधिक संख्या में प्रवेश दिया जा सकेगा और प्रमुख विषयों में सीटों की कमी की समस्या भी कुछ हद तक दूर हो सकती है।
रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोलना कॉलेज के अधिकार क्षेत्र में नहीं
रजिस्ट्रेशन पोर्टल को बार-बार खोले और बंद किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर प्राचार्य ने कहा कि यह निर्णय कॉलेज स्तर पर नहीं लिया जाता। प्रवेश पोर्टल खोलने, बंद करने और सीटों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार विश्वविद्यालय स्तर पर है। कॉलेज की भूमिका विद्यार्थियों को उपलब्ध सीटों के अनुसार प्रवेश देने और आवश्यक प्रस्ताव विश्वविद्यालय को भेजने तक सीमित है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने सीटें बढ़ाने के लिए अपनी ओर से प्रस्ताव भेज दिया है और अब विश्वविद्यालय तथा संबंधित स्तर से निर्णय का इंतजार है।
छात्रों की नजर अब विश्वविद्यालय के फैसले पर
एमबीपीजी कॉलेज में प्रवेश को लेकर छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच बना गतिरोध फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर छात्र इतिहास, राजनीति विज्ञान और अन्य प्रमुख विषयों में सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं कॉलेज प्रशासन स्वीकृत सीटों की सीमा का हवाला दे रहा है। ऐसे में अब पूरे मामले का समाधान विश्वविद्यालय और राज्यपाल स्तर पर लंबित सीट वृद्धि के प्रस्ताव की स्वीकृति पर निर्भर माना जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रख रहा है तो उसे प्रवेश के लिए पर्याप्त सीटों की व्यवस्था भी करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को उनकी पसंद के विषयों से वंचित न होना पड़े। वहीं कॉलेज प्रशासन का कहना है कि स्वीकृत सीटों से अधिक प्रवेश देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। अब छात्रों की निगाहें कुमाऊं विश्वविद्यालय के निर्णय और 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के प्रस्ताव पर टिकी हैं।










