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ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल कैम्पस में साइबर अपराध, नशे और यातायात सुरक्षा पर जागरूकता सत्र

भीमताल/नैनीताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल कैंपस में विद्यार्थियों को साइबर अपराध, नशे के दुष्प्रभाव और यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नैनीताल के पुलिस अधीक्षक (क्राइम एवं ट्रैफिक) डॉ. जगदीश चंद्र मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर महेश चंद्र सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और युवा वर्ग भी इसके निशाने पर है। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और यातायात नियमों की अनदेखी से होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने वास्तविक घटनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि साइबर अपराधी लोगों को डराकर और भ्रमित करके उनसे पैसे ठगने का प्रयास करते हैं। डॉ. चंद्र ने स्पष्ट किया कि कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी फोन कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। साइबर ठग अक्सर पुलिस, कस्टम विभाग या अन्य सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों को भयभीत करते हैं और उनसे धनराशि ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है तो वह तत्काल 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करे तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए।

महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों को लेकर किया जागरूक

डॉ. चंद्र ने महिलाओं को निशाना बनाकर किए जा रहे साइबर अपराधों पर भी विशेष चर्चा की। उन्होंने डेटिंग स्कैम, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, फोटो मॉर्फिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसे मामलों से सतर्क रहने की सलाह दी। विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने के लिए प्रेरित किया गया।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार का ऑनलाइन उत्पीड़न या धोखाधड़ी सामने आती है तो विद्यार्थी बिना झिझक अपने अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस से संपर्क करें।

नशे से दूर रहने का दिया संदेश

सत्र के दौरान नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा कि कई बार साथियों के दबाव या जिज्ञासा के कारण शुरू हुआ नशा धीरे-धीरे गंभीर लत में बदल जाता है। इसका असर न केवल पढ़ाई पर पड़ता है बल्कि पारिवारिक जीवन, आर्थिक स्थिति और भविष्य भी प्रभावित होता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट की जानकारी देते हुए नशे से पूरी तरह दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

यातायात नियमों के पालन पर दिया जोर

कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को लेकर भी विशेष जागरूकता दी गई। विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, तेज गति से वाहन न चलाने और शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के बाद वाहन न चलाने की सलाह दी गई।

यातायात नियमों पर आधारित एक वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं के कारणों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा

सत्र के समापन पर डॉ. जगदीश चंद्र ने विद्यार्थियों से अपनी स्वतंत्रता का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने, नकारात्मक संगति से दूर रहने और अपने कौशल को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रसिद्ध कथन— “सपना वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह है जो आपको सोने नहीं देता।” —का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंत में परिसर निदेशक ने डॉ. जगदीश चंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति और यातायात जागरूकता जैसे विषयों पर मिली व्यावहारिक जानकारी विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ— “क्लिक करने से पहले सोचें, नशे को ना कहें, यातायात नियमों का पालन करें और सदैव सतर्क रहें।”

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