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भीमताल में बारिश-ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूटी,  मार्केट रेट पर तत्काल मुआवजे की मांग उठाई

पर्वतीय किसानों के लिए विशेष कृषि नीति बनाने और बिना सर्वे की देरी के राहत देने की मांग

भीमताल विधानसभा क्षेत्र में बीते दो दिनों से हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के अधिकांश मौसमी सब्जी उत्पादक और फल उत्पादक इलाकों में फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर किसानों की तैयार फसलें पूरी तरह नष्ट होने की स्थिति में पहुंच गई हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज शर्मा ने कहा कि बदलते मौसम चक्र और लगातार हो रही बेमौसमी बारिश तथा ओलावृष्टि की मार से पर्वतीय किसान पिछले कई वर्षों से नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसानों की मेहनत और फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, तब सरकार को सर्वे और औपचारिकताओं में समय गंवाने के बजाय तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए।

मनोज शर्मा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि भीमताल विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक प्रभावित किसान को बिना किसी शर्त के उसकी फसल का मार्केट मूल्य निर्धारित कर मुआवजा दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल बीमा योजनाओं का लाभ किसानों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है और बीमा कंपनियों के अलग-अलग मानकों के कारण किसानों को उचित राहत नहीं मिलती।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग हैं, इसलिए उत्तराखंड के पहाड़ी किसानों के लिए एक विशेष कृषि नीति बनाई जानी चाहिए। शर्मा ने कहा कि वर्षों से इस मांग को उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी किसानों के मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसानों की लगातार उपेक्षा होती रही तो लोग खेती छोड़ने को मजबूर होंगे, जिससे पहाड़ों से पलायन और तेज होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

मनोज शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि प्रभावित किसानों को तत्काल राहत प्रदान करने के साथ-साथ पर्वतीय कृषि को बचाने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी नीति लागू की जाए।

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