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मुनस्यारी में सीजन की पहली बर्फबारी, किसानों के चेहरे खिले, हिमालयी क्षेत्र को मिलेगी बड़ी राहत

नामिक में हुई जमकर बर्फबारी, हिमालयी गांवों में लौटी रौनक

रिपोर्टर – गोविंद राणा 

पिथौरागढ़। सीमांत तहसील मुनस्यारी में इस सीजन की पहली बर्फबारी होने से पूरे क्षेत्र में ठंड का असर बढ़ गया है। बर्फ से ढके पंचाचूली सहित आसपास के हिमालयी शिखरों ने एक बार फिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता बिखेर दी है। लंबे समय से बर्फबारी न होने के कारण जो पहाड़ काले और सूखे नजर आने लगे थे, वे अब सफेद चादर ओढ़े दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय किसानों और बागवानों के लिए यह बर्फबारी किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस बार हेमंत ऋतु में अपेक्षित बर्फबारी नहीं होने से खेती और बागवानी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी। खासतौर पर सेब, राजमा, आलू और अन्य रबी फसलों के लिए बर्फबारी का न होना चिंता का विषय बन गया था। अब पहली बर्फबारी होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और आने वाले समय में अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है।

पर्यावरण की दृष्टि से भी यह बर्फबारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बर्फ के अभाव में हिमालयी क्षेत्र में जल स्रोतों के सूखने, तापमान में असामान्य वृद्धि और ग्लेशियरों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बनी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फबारी से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा, प्राकृतिक जलधाराओं को जीवन मिलेगा और गर्मियों में जल संकट की स्थिति से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।

वहीं बर्फबारी के बाद मुनस्यारी में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की भी संभावना है। बर्फ से ढके पहाड़ और ठंडा मौसम पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिससे स्थानीय लोगों की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि मौसम को देखते हुए सावधानी बरतें और अनावश्यक जोखिम न लें।

कुल मिलाकर, मुनस्यारी में हुई इस सीजन की पहली बर्फबारी को खेती, पर्यावरण और पर्यटन—तीनों के लिहाज से शुभ संकेत माना जा रहा है।

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