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मान्यता है कि पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

महाभारत के युद्ध में अपने स्वजनों को खोने के बाद पांडवों पर मानव हत्या का बोझ था।

ऋषि व्यास के निर्देश पर पांडवों ने अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव की आराधना की।

एक अन्य मान्यता के मुताबिक, माता पार्वती ने भी यहां शिव जी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी।

तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड के गढ़वाल ज़िले के रुद्रप्रयाग में स्थित है. यह पंच केदारों में सबसे ऊंचाई पर बना मंदिर है।

यह मंदिर करीब 1,000 साल पुराना माना जाता है.

तुंगनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ और मान्यताएं: 

तुंगनाथ मंदिर में शिव की भुजा स्थापित है।

शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेर में और जटा कल्पेर में प्रकट हुईं।

इसलिए इन चारों स्थानों सहित केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है।

तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है।

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