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उत्तराखंड के जंगल में खोई युवती, खूंखार जानवरों के बीच 6 दिन घास खाकर रही जिंदा, आखिर कैसे बची जान?

मजखाली की मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती रास्ता भटककर 12–13 किलोमीटर अंदर जंगल में पहुंची, हरी घास और पत्तियां खाकर बचाई जान, ग्रामीणों की सूचना पर SDRF और पुलिस ने सुरक्षित निकाला।

रानीखेत। अल्मोड़ा जिले के रानीखेत क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। मजखाली गांव की रहने वाली एक युवती, जो पिछले छह दिनों से घने जंगल में लापता थी, उसे एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सुरक्षित खोज निकाला। भूख, प्यास और खूंखार जंगली जानवरों के खतरे के बीच छह दिन तक जीवित रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती 1 जुलाई 2026 को अपने पिता के साथ जंगल की ओर टहलने गई थी। लौटते समय रास्ते में उसे थकान महसूस हुई, जिस पर वह कुछ देर आराम करने के लिए बैठ गई। पिता उसे वहीं छोड़कर आगे बढ़ गए और लगभग 20 मिनट बाद जब वापस लौटे तो युवती वहां नहीं थी।

परिजनों ने पहले अपने स्तर पर जंगल में उसकी तलाश की, लेकिन उन्हें केवल उसकी एक चप्पल मिली। क्षेत्र में तेंदुओं और अन्य जंगली जानवरों की सक्रियता को देखते हुए परिवार किसी अनहोनी की आशंका से घिर गया। इसके बाद रानीखेत पुलिस और एसडीआरएफ को सूचना दी गई, जिसके बाद लगातार सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।

इसी बीच मंगलवार, 7 जुलाई को कुछ ग्रामीण जंगल में घास और चारा लेने गए थे। इस दौरान उन्हें जंगल के बेहद अंदर से किसी महिला की चीखने की आवाज सुनाई दी। ग्रामीण आवाज की दिशा में पहुंचे तो वहां युवती घायल, कमजोर और बदहवास हालत में मिली। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस और एसडीआरएफ को दी।

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की सरियापानी पोस्ट और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। युवती ने बताया कि पिता से बिछड़ने के बाद वह रास्ता भूल गई और लगातार जंगल के और अंदर चली गई। छह दिनों तक उसे खाने के लिए कुछ नहीं मिला, इसलिए उसने हरी घास और जंगली पत्तियां खाकर किसी तरह अपनी जान बचाई। रात के समय जंगली जानवरों की आवाज सुनकर वह झाड़ियों में छिपकर पूरी रात गुजारती रही।

रेस्क्यू अभियान भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। युवती जिस स्थान पर मिली, वहां तक कोई सड़क या वाहन नहीं पहुंच सकता था। घने जंगल और पथरीले रास्तों के बीच एसडीआरएफ के जवानों ने उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर अपने कंधों पर कई किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां पहले से मौजूद एम्बुलेंस से उसे तत्काल राजकीय चिकित्सालय रानीखेत भेजा गया।

अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार युवती छह दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के कारण काफी कमजोर हो गई थी तथा शरीर पर खरोंचों के निशान भी हैं। हालांकि समय पर उपचार मिलने से उसकी हालत अब स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।

इस सफल रेस्क्यू अभियान में एसडीआरएफ और रानीखेत पुलिस की तत्परता की सराहना की जा रही है। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में जाते समय पूरी सावधानी बरतें और अकेले या असुरक्षित परिस्थितियों में जंगल की ओर न जाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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