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 हल्द्वानी। उत्तराखंड में विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पेश होने के बाद एक तरफ लोगों में उत्साह है तो कहीं विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

महिलाओं में जहां बिल को लेकर खुशी है तो वहीं समाज के एक वर्ग में बिल को लेकर नाराजगी भी जताई है और इसे लोकतंत्र और धर्म से भी जोड़ कर देख रहे हैं।

वहीं अधिवक्ताओं और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों ने इसे देश की अखंडता और सम्प्रभुता से जोड़ा है और कहा कि बिल संपूर्ण देश में लागू किया जाना चाहिए ताकि देश के प्रत्येक नागरिक के साथ न्याय हो और निश्चित तौर पर इस बिल के आने से देश को एक नई दिश मिलेगी।

वहीं मुस्लिम नेताओं ने इसे गैर जरुरी बताया और न्यायालय में शरण लेने की बात की है और कहा है कि इस वक्त प्रदेश में अन्य मुद्दे शिक्षा, बेरोजगारी, चिकित्सा जैसे विषयों पर ध्यान देने की जरुरत थी।

मगर केवल चुनावी स्टंट के तौर पर इसे पेश किया गया है लेकिन प्रदेश सरकार को इसका खमियाजा भी भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

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