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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाली पीठ में उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से स्थानांतरित मामले पर सुनवाई 

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा- हाईकोर्ट स्थानांतरण का फैसला प्रशासनिक समन्वय से हो, न्यायालय जनमत संग्रह का आदेश नहीं दे सकता

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नई दिल्ली/नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी (गौलापार) स्थानांतरित किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय को स्थानांतरित करने जैसे प्रशासनिक विषय पर जनमत संग्रह (रैफरेंडम) कराने का आदेश देना न्यायिक अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 4 मई 2024 के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त (सेट असाइड) कर दिया, जिसमें जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी।

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार और उच्च न्यायालय प्रशासन आपसी समन्वय से स्थानांतरण से जुड़े सभी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक मुद्दों का समाधान निकालें। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष बैठक कर व्यवहारिक निष्कर्ष पर पहुंचें।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि न्यायालय का कार्य जनमत संग्रह कराना नहीं है। बुनियादी ढांचे और स्थान परिवर्तन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया निर्धारित है और उसी के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। यह विवादित आदेश तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने पारित किया था, जिसमें गौलापार की चिन्हित भूमि को उच्च न्यायालय के लिए अनुपयुक्त बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि उत्तराखंड सरकार ने हल्द्वानी में नए हाईकोर्ट परिसर के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर ली है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि संबंधित भूमि से जुड़ी सभी आवश्यक मंजूरियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (क्लियरेंस) छह सप्ताह के भीतर पूरे किए जाएं। इसके बाद भूमि तत्काल हाईकोर्ट प्रशासन को सौंपकर नए परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जब उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के जनमत संग्रह संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले उस आदेश पर रोक लगाई थी और अब उसे पूरी तरह रद्द करते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।

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