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उत्तराखंड में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, दो बुजुर्गों से सवा करोड़ की लूट

हल्द्वानी में युवक को ऑनलाइन ट्रेडिंग करना पड़ा भारी, वेबसाइट के जरिए लाखों की साइबर ठगी,

देहरादून। राजधानी देहरादून में साइबर अपराधियों ने “डिजिटल अरेस्ट” और शेयर मार्केट में निवेश का झांसा देकर दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों से कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपये की ठगी कर ली। दोनों पीड़ित ऑनलाइन ठगी के तरीकों से अनजान थे और अपराधियों के जाल में फंसकर अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी गंवा बैठे। दोनों मामलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

अजबपुर कलां निवासी मंगल सिंह रावत, जो जल निगम से सेवानिवृत्त हैं, को 21 नवंबर 2025 को एक धमकी भरा फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। इसके बाद उन्हें एक अन्य नंबर दिया गया, जिस पर बात करने पर कॉलर ने खुद को सीबीआई दिल्ली का अधिकारी बताया।

ठगों ने दावा किया कि बाराखंभा स्थित एक बैंक खाते से मंगल सिंह के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है और इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। लगातार दबाव और डर का माहौल बनाकर 10 दिसंबर 2025 को उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” होने की बात कही गई।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के भय से मंगल सिंह रावत ने अलग-अलग खातों में कुल 64.65 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में परिजनों को जानकारी मिलने पर ठगी का खुलासा हुआ और मामला साइबर पुलिस तक पहुंचा।

इसी तरह गोविंद नगर, ऋषिकेश निवासी राजीव साहनी, जो हिंदुस्तान नेशनल ग्लास लिमिटेड से सेवानिवृत्त हैं, को 11 दिसंबर 2025 को व्हाट्सएप कॉल के जरिए यतिन शाह नामक व्यक्ति ने संपर्क किया। आरोपी ने खुद को आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट का सीईओ बताकर विश्वास जीता और शेयर मार्केट में बड़े मुनाफे का लालच दिया।

16 दिसंबर 2025 से 28 जनवरी 2026 के बीच राजीव साहनी ने अलग-अलग खातों में कुल 55.48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने निवेश की राशि निकालने की कोशिश की तो ठगों ने और 25 लाख रुपये जमा करने का दबाव बनाया। तभी उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

 हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र के एक युवक ने पुलिस में लिखित तहरीर देते हुए कहा है कि दिसंबर माह में टेलीग्राम एप के जरिए कुछ अज्ञात लोगों ने संपर्क कर उन्हें ट्रेंडिंग वेबसाइट का लिंक शेयर किया। वेबसाइट पर लॉगइन करने के लिए कहा।

शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए पहले दिन कुछ बोनस भी दिखाया गया, जिससे वे ठगों के जाल में फंस गए। 25 दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच ठगों के बताए गए अलग-अलग खातों में उन्होंने कुल 5.20 लाख रुपये जमा कराए।

पीड़ित का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम जमा कराने के बावजूद न तो उन्हें कोई बोनस मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई। इसके बाद युवक को ठगी का एहसास हुआ।इसके बाद जब उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की तो ठगों ने जवाब देना बंद कर दिया।

पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाना हल्द्वानी में दर्ज कराई है। हल्द्वानी कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दी गई है। साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

📊 13 माह में 93 साइबर केस

पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में साइबर अपराध के 92 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 10 मामले डिजिटल अरेस्ट से जुड़े थे। वहीं वर्ष 2026 में सिर्फ एक माह में 11 साइबर अपराध के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिनमें पांच डिजिटल अरेस्ट के मामले हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के शिकार अधिकतर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक बन रहे हैं।

🚨 साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट से बचाव के टिप्स

अनजान कॉल पर भरोसा न करें। पुलिस, सीबीआई, बैंक या कस्टम अधिकारी बनकर आने वाली कॉल प्रायः फर्जी होती हैं।

ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक डिटेल किसी को न दें। असली अधिकारी कभी यह जानकारी नहीं मांगते।

संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें – केवाईसी अपडेट, पार्सल अटका, पैसे दोगुने जैसे मैसेज अधिकतर ठगी के होते हैं।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप (AnyDesk, TeamViewer आदि) इंस्टॉल न करें।

यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट या अनजान क्यूआर कोड स्कैन न करें।

ठगी का शक हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पहले 30 मिनट बेहद अहम होते हैं।

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