उत्तराखण्ड देवभूमि ट्रक ऑनर्स महासंघ ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, ट्रांसपोर्ट नीति और टैक्स राहत समेत कई मांगें उठाईं
हल्द्वानी। उत्तराखण्ड देवभूमि ट्रक ऑनर्स महासंघ ने परिवहन विभाग और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
महासंघ ने आरोप लगाया कि मनमाने चालान, ऑनलाइन चालानी कार्रवाई और बार-बार वाहनों की जांच के नाम पर रोके जाने से ट्रांसपोर्ट कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के ट्रक मालिक अपनी गाड़ियों की चाबियां आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में जमा कर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
हल्द्वानी में आयोजित महासंघ की बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि पिछले कई महीनों से ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और वाहन चालकों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। उनका आरोप है कि नियमों के नाम पर अनावश्यक चालान किए जा रहे हैं और परिवहन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि हाल ही में रामनगर के एक ट्रक स्वामी पर 2 लाख 41 हजार रुपये का चालान किया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह अनुचित और अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से वाहन स्वामियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
संगठन ने ऑनलाइन चालान व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में खड़े वाहनों पर चालान चस्पा कर दिए जाते हैं तथा ऑनलाइन चालान की प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई जा रही है। इससे वाहन मालिकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर भी नहीं मिल पाता।
महासंघ ने सरकार से प्रदेश के ट्रांसपोर्ट कारोबार के लिए अलग और व्यावहारिक ट्रांसपोर्ट नीति बनाने, टैक्स एवं पेनाल्टी में राहत देने, वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना लागू करने, पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप परिवहन नियमों में संशोधन करने तथा वाहन स्वामियों को आर्थिक राहत प्रदान करने की मांग की है।
बैठक में यह भी कहा गया कि वीआईपी मूवमेंट, पर्यटन सीजन और वीकेंड के दौरान वाहनों की आवाजाही पर बार-बार लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से माल ढुलाई प्रभावित होती है, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए तो प्रदेशभर के ट्रक मालिक अपनी गाड़ियों की चाबियां आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में जमा कर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की होगी।



