रामगढ़/नैनीताल। रामगढ़ ब्लॉक के बोहराकोट गांव में बाहरी बिल्डर द्वारा 11 केवी विद्युत लाइन बिछाने के लिए हरे-भरे बांज के पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि विद्युत विभाग और बिल्डर की मिलीभगत से मानकों की अनदेखी करते हुए विद्युत लाइन डाली जा रही है, जिसके लिए बड़ी संख्या में बांज के पेड़ों को काट दिया गया।
भीमताल विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज शर्मा ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बाहरी बिल्डरों द्वारा पहाड़ों में आतंक का माहौल पैदा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग नियमों और मानकों की धज्जियां उड़ाकर बिल्डर को लाभ पहुंचाने में जुटा है।
उनका कहना है कि पूरे गांव के विरोध के बावजूद सैकड़ों हरे-भरे बांज के पेड़ों की कटाई की गई और विद्युत लाइन भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं डाली जा रही है।
मनोज शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत किया जाता है, लेकिन स्थानीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और नियमों की अनदेखी कर मनमानी करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पहाड़ के लोगों के धैर्य की परीक्षा लेने का प्रयास न किया जाए।
वहीं कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष एवं बोहराकोट के सरपंच भुवन सिंह दर्मवाल, ग्राम प्रधान रीता दर्मवाल तथा समाजसेवी हेमू दर्मवाल ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है और कुछ ग्रामीणों के वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़, जंगल और गांव उनके लिए मंदिर के समान हैं तथा यहां की परंपराओं और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करना उनका दायित्व है।
उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति भाईचारे और सम्मान की भावना से यहां आएगा उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन किसी प्रकार की दबंगई या मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा बिल्डर के पक्ष में अनुमति दिए जाने के बाद 11 केवी लाइन डालने के लिए बांज के पेड़ों की कटाई की गई। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठाई जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बिल्डरों को संरक्षण देने वाले विभागीय अधिकारियों का क्षेत्र में विरोध किया जाएगा तथा भविष्य में होने वाली बीडीसी बैठकों में उनका बहिष्कार भी किया जा सकता है।
सभी ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।


