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देहरादून। उत्तराखंड में पिछले चार दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ से लेकर मैदान तक लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार 04 सितंबर 2026 को प्रदेशभर में भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, नैनीताल, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं अत्यंत तीव्र से मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। लगातार बरसात के कारण प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की चिंता बढ़ गई है। संवेदनशील पर्वतीय इलाकों में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।

भूस्खलन से बार-बार बंद हो रहे सड़क मार्ग

पहाड़ी जिलों में लगातार हो रही बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा चरम पर पहुंच गया है। जगह-जगह पहाड़ियों से मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने के कारण ग्रामीण संपर्क मार्गों के साथ ही प्रमुख मोटर मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हो रहे हैं।

कई क्षेत्रों में सड़कें खुलने के कुछ समय बाद ही दोबारा मलबा आने से बंद हो रही हैं। इससे दूरदराज के गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों और बाजार क्षेत्रों से प्रभावित हो रहा है। लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन की टीमें लगातार जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मार्गों को खोलने में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत और बहाली कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है।

कोसी और गौला नदी उफान पर, तराई क्षेत्रों में बढ़ा खतरा

कुमाऊं मंडल में भी बारिश का असर गंभीर होता जा रहा है। कोसी और गौला नदी उफान पर बह रही हैं और इनके जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, बनबसा बैराज से शारदा नदी में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद तराई और सीमांत क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे के क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों से अनावश्यक रूप से नदी और बरसाती नालों के आसपास नहीं जाने की अपील की जा रही है।

अल्मोड़ा में स्कूल बंद, बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता

मौसम के गंभीर रुख को देखते हुए अल्मोड़ा जिले में एहतियातन सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों को बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है।

लगातार बारिश और घने बादलों के कारण राज्य के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। सितंबर के पहले सप्ताह में ही मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। दिन के समय भी कई इलाकों में लोगों को गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस हो रही है।

चमोली में 36 घंटे से मूसलाधार बारिश, सड़कें बनीं मलबे की दरिया

सीमांत जनपद चमोली में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। यहां पिछले करीब 36 घंटों से लगातार मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बोल्डर बहकर सड़कों पर पहुंच रहे हैं।

बारिश ने सीमांत घाटियों और कस्बों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सबसे अधिक असर गोपेश्वर-कुंड मोटर मार्ग पर देखने को मिल रहा है, जहां पहाड़ों से आया भारी मलबा और कीचड़ सड़क पर दरिया की तरह बहने लगा। इसके चलते मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।

दर्जनों संपर्क मार्ग कटे, ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित

लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले दर्जनों संपर्क मार्ग प्रभावित हो गए हैं। कई स्थानों पर सड़कें मलबे से पूरी तरह पट गई हैं, जबकि कुछ जगहों पर सड़क का हिस्सा बहने की भी स्थिति बन गई है।

सड़क संपर्क बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने और आपात स्थिति के लिए जरूरी सामान जुटाने में लगे हुए हैं।

लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली कार्यों में जुटी हैं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है, लेकिन लगातार बारिश और पहाड़ियों से गिरते पत्थर कार्य में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

अगले कुछ घंटे चुनौतीपूर्ण, प्रशासन अलर्ट मोड में

मौसम विभाग के अलर्ट और लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

लोगों से अपील की जा रही है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के किनारे न जाएं और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें। लगातार जारी बारिश के कारण आने वाले घंटे उत्तराखंड के लिए चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन की निगाहें अब मौसम की अगली स्थिति तथा नदियों के बढ़ते जलस्तर पर टिकी हुई हैं।

नैनीताल और चंपावत में उफान पर नदियां, तराई के मैदानी इलाकों में हाई अलर्ट

सरोवर नगरी नैनीताल और सीमांत जिले चंपावत में कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. नैनीताल जिले के पर्वतीय हिस्सों में हो रही अनवरत बरसात से प्रसिद्ध गौला और कोसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. चंपावत के बनबसा बैराज से शारदा नदी में 1 लाख क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज किए जाने के बाद ऊधमसिंह नगर और सीमांत मैदानी इलाकों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है. जिला प्रशासन ने नदी के डूब क्षेत्र और तटवर्ती गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को किनारों से दूर रहने के लिए कहा है.

बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की बूंदाबांदी के बीच भारी बारिश की आशंका

बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में फिलहाल कई स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी और रिमझिम फुहारें पड़ रही हैं, लेकिन बादलों के भारी जमावड़े को देखते हुए मौसम विभाग ने इसे बड़े खतरे का संकेत बताया है. 4 सितंबर के पूर्वानुमान के मुताबिक बागेश्वर जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश और तीव्र गर्जना की संभावना व्यक्त की गई है. वहीं सीमांत पिथौरागढ़ में धारचूला, मुनस्यारी और डीडीहाट जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कें बंद होने की आशंका बनी हुई है.

रुद्रप्रयाग और टिहरी में चारधाम यात्रा मार्गों पर पैनी नजर

रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में भी बादलों का घना पहरा बना हुआ है और दोनों दिलों के कई हिस्सों में झमाझम बारिश जारी है. केदारनाथ पैदल मार्ग और ऋषिकेश-बद्रीनाथ/केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का जोखिम लगातार बढ़ रहा है. रुद्रप्रयाग के संवेदनशील डेंजर जोन पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात रखा गया है ताकि मलबा आने पर तुरंत मार्ग को साफ किया जा सके.

5 से 7 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार उत्तराखंड में मानसूनी गतिविधियों का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है और आगामी 7 सितंबर तक पूरे प्रदेश में मौसम बेहद सक्रिय रहेगा:

05 सितंबर: देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का यलो अलर्ट रहेगा. राज्य के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और अति तीव्र बौछारें पड़ने की संभावना है.

06 सितंबर: बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी और चमोली जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि बाकी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज होगी.

07 सितंबर: कुमाऊं के बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है.

08 और 09 सितंबर: पूरे प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है.

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