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भीमताल। ओखलकांडा ब्लॉक के ग्राम कौडार में इस वर्ष भी होली का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोए ग्रामीणों ने सामूहिक होली गायन और नृत्य के माध्यम से पूरे गांव को रंगमय बना दिया है।

सांस्कृतिक उल्लास और सामूहिक गायन

गांव के पुरुषों ने पारंपरिक होली गीतों के साथ घर-घर जाकर होली गायन किया। ढोलक की थाप और मंजीरों की मधुर खनक के बीच वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा।

“आओ पिया आ रही है” जैसे लोकप्रिय होली गीतों पर महिलाएं भी झूम उठीं और आंगन में एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

परंपरा को संजोने का संकल्प

ग्रामीणों का कहना है कि कौडार में होली का यह स्वरूप वर्षों से चला आ रहा है। नई पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

सामूहिक गायन और नृत्य न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करता है।

ग्रामवासियों ने भावुक होते हुए कहा, “हमारी परंपराएं ही हमारी पहचान हैं। होली के ये गीत और नृत्य हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।”

परदेस में रह रहे युवाओं को मलाल

ग्राम सभा कौडार के कई युवा रोजगार और नौकरी के सिलसिले में अन्य राज्यों और शहरों में रह रहे हैं। ऐसे में इस बार कुछ युवा होली में शामिल नहीं हो सके, जिसका उन्हें मलाल है। हालांकि कई युवा विशेष रूप से गांव पहुंचे और होली गायन की परंपरा में भाग लेकर उत्सव की रौनक बढ़ाई।

कौडार की यह पारंपरिक होली न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और आपसी प्रेम का भी प्रतीक बनकर उभर रही है।

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