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गांधी जयंती पर डीएसबी परिसर में कार्यक्रम, गांधी जी के कुमाऊं प्रवास और विचारों को किया याद

नैनीताल। डीएसबी परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। इस दौरान गांधी जी के सत्य, अहिंसा और सादगी के विचारों तथा शास्त्री जी के त्याग, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा को याद किया गया।

कार्यक्रम में डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. संजय पंत, चीफ प्रॉक्टर प्रो. हरीश बिष्ट और डीन प्रो. रीना सिंह ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर निदेशक प्रो. संजय पंत ने कहा कि महात्मा गांधी की अहिंसा की शक्ति ने देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांधी जी ने अपने विचारों और संघर्ष के माध्यम से पूरी दुनिया को अहिंसा की शक्ति को पहचानने की सीख दी। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी समाज और युवाओं के लिए प्रेरणादायी हैं।

चीफ प्रॉक्टर प्रो. हरीश बिष्ट ने गांधी जी के दृढ़ निश्चय और उनके संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपने जीवन का आधार बनाया और इसी मार्ग पर चलते हुए देश को नई दिशा दी।

प्रो. सावित्री कैरा ने कुमाऊं से गांधी जी के ऐतिहासिक जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी लगभग 21 दिन कुमाऊं में रहे और इस दौरान उन्होंने करीब 25 स्थानों पर लोगों को संबोधित किया। उनकी सरलता, सहजता और विचारों ने कुमाऊं क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति प्रदान की।

कार्यक्रम में श्वेता पंत, पूजा टम्टा, दीप्ति और रिया ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन और विचारों पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं वैभवी एवं उनके समूह ने गांधी जी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

संगीत विभाग की टीम ने डॉ. रवि जोशी के नेतृत्व में गांधी जी के प्रिय भजनों ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’, ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’ और सभी की सहभागिता से ‘रघुपति राघव राजा राम’ की मनमोहक प्रस्तुति दी। भजनों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक और भावनात्मक वातावरण बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने किया। उन्होंने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन-वृत्त पर प्रकाश डालते हुए गांधी दर्शन की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने गांधी जी के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि “व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।” उन्होंने गांधी जी की सत्य और अहिंसा की शिक्षा को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश बताया।

प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि गांधी जी का मानना था कि सत्य उनका भगवान है और अहिंसा उसे प्राप्त करने का साधन। उन्होंने कहा कि गांधी जी का जीवन हमें सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया।

कार्यक्रम में प्रो. मनोज कुमार आर्य, डॉ. अशोक कुमार (विभागाध्यक्ष टूरिज्म), डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. हृदेश शर्मा, डॉ. कुबेर, डॉ. संध्या, डॉ. नवीन पांडे, डॉ. दिव्या पांगती, नंदा बल्लभ पालीवाल, विपिन कुमार, देवेंद्र बिष्ट, कुंदन, लाल सिंह, नवीन पालीवाल, डॉ. हर्ष वर्धन और डॉ. नगमा परवीन सहित परिसर के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। गौर देवी, केपी, रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास तथा एनसीसी कैडेट्स की भी कार्यक्रम में सहभागिता रही।

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