ब्रेकिंग न्यूज़
नंदा देवी महोत्सव के समापन पर 23 सितंबर को नैनीताल जिले के इन क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज रहेग बंद, आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अवकाशफर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने का मामला, अभ्यर्थी के पिता समेत एजुकेशन कंसल्टेंसी संचालक गिरफ्तारश्री नन्दा देवी महोत्सव की पंचारती में उमड़ा आस्था का सैलाब, कुलपति, आईजी और केएमवीएन एमडी ने की मां नंदा-सुनंदा की आरतीयूओयू ने बढ़ाई जुलाई 2026 सत्र की प्रवेश तिथि, अब इस तारीख तक कर सकेंगे ऑनलाइन दाखिलानैनीताल नंदा देवी महोत्सव में मुख्यमंत्री ने मां नयना देवी के किए दर्शन, प्रदेश की खुशहाली की कामना

विश्व पुस्तक दिवस हर वर्ष 23 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसे यूनेस्को द्वारा पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चुना गया है। वर्ष 2026 में इस दिवस की थीम “रीड योर वे” यानी “अपने तरीके से पढ़ें” रखी गई है, जो पढ़ने के आनंद, आदत विकसित करने, अपनी पसंद की पुस्तकों के चयन और ज्ञान साझा करने के अधिकार पर विशेष जोर देती है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 तक दुनिया में लगभग 129,864,880 अद्वितीय किताबें मौजूद थीं। यह आंकड़ा प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार के बाद से आईएसबीएन, पुस्तकालयों और अन्य स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया था।

हाल के वर्षों में भारतीय धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों को भी वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। भगवद गीता को यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल किया गया है, जबकि रामचरितमानस की पांडुलिपियों को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में स्थान मिला है। उल्लेखनीय है कि रामचरितमानस में ‘राम’ शब्द 1443 बार आता है।

सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में बाइबिल का पहला स्थान है, जिसकी 2021 तक 5 से 7 अरब प्रतियां बिक चुकी हैं, वहीं कुरान की 4 अरब से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, वर्ष 2023 तक 100,100 पृष्ठों वाली पुस्तक दुनिया की सबसे मोटी पुस्तक मानी गई है।

नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले 2026 में रिकॉर्ड संख्या में पाठकों की भागीदारी देखने को मिली, जो पुस्तकों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

हिंदी साहित्य में ‘राग दरबारी’ (श्रीलाल शुक्ल), ‘गुनाहों का देवता’ (धर्मवीर भारती), ‘रश्मिरथी’ (रामधारी सिंह दिनकर), ‘मैला आँचल’ (फणीश्वरनाथ रेणु) और ‘चित्रलेखा’ (भगवतीचरण वर्मा) जैसी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ (महात्मा गांधी) और ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ (भगत सिंह) जैसी पुस्तकें प्रेरणादायक मानी जाती हैं।

पुस्तकों को ज्ञान का आधार माना जाता है, जो जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती हैं। इसी संदर्भ में एक प्रसिद्ध श्लोक भी है—

“पुस्तके पठितः पाठः जीवने नैव साधितः।

किं भवेत् तेन पाठेन जीवने यो न सार्थकः॥”

अर्थात, यदि पुस्तकों से सीखी गई बातों को जीवन में नहीं उतारा जाए, तो उस ज्ञान का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता।

Advertisement
यह भी पढ़ें :  हल्द्वानी में बंद मकानों की रेकी कर चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा, एक आरोपी गिरफ्तार; साथी फरार, दिन में बनते थे पेंटर, रात में करते थे चोरी!…

You missed

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.