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उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध आस्था केंद्र केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि आधिकारिक रूप से घोषित कर दी गई है। 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वृष लग्न में श्रद्धालुओं के लिए बाबा केदार के द्वार खोले जाएंगे। यह निर्णय धार्मिक परंपराओं के तहत ओंकारेश्वर मंदिर में विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना के बाद लिया गया।
घोषणा के साथ ही यात्रा मार्गों, होटलों, गेस्ट हाउसों और पंजीकरण केंद्रों पर हलचल तेज हो गई है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने का भरोसा दिलाया है। लाखों श्रद्धालु अब यात्रा की तैयारी, पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच में जुट गए हैं।
आस्था और इतिहास का संगम
मंदाकिनी नदी के तट पर हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ धाम चारधाम यात्रा का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका निर्माण पांडवों ने कराया था। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर वर्ष कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
शीतकाल में ऊखीमठ में पूजा
भारी हिमपात के कारण शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भगवान की उत्सव मूर्ति को ऊखीमठ लाया जाता है, जहां शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में नियमित पूजा होती है। मौसम सामान्य होने पर विधिवत प्रक्रिया के बाद कपाट खोले जाते हैं।
प्रमुख यात्रा मार्ग
केदारनाथ पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून) है, जो गौरीकुंड से लगभग 255 किमी दूर है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुंड पहुंचा जा सकता है। वहां से श्रद्धालु पैदल, खच्चर, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से मंदिर तक पहुंचते हैं।
पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरूरी
यात्रा 2026 में संख्या सीमा नहीं रखी गई है, लेकिन सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। गुप्तकाशी और सोनप्रयाग के चिकित्सा केंद्रों से फिटनेस प्रमाणपत्र लेना भी आवश्यक रहेगा। स्वस्थ पाए जाने पर ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।
विशेष तैयारियां
इस वर्ष मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में टी. गंगाधर लिंग की नियुक्ति की गई है। प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा।
केदारनाथ यात्रा 2026 के लिए उत्साह चरम पर है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की संख्या नए रिकॉर्ड बना सकती है।

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