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उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी/एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीजेपी नेता एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (MLC) धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की करीब 14 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में स्थित तीन शिक्षण संस्थानों पर की गई है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति योजना के तहत फर्जी छात्रों को दर्शाकर करीब 29 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। मामला मेरठ स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि धर्मेंद्र भारद्वाज ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि संबंधित शिक्षण संस्थानों की प्रबंधन समितियों से उनका कोई संबंध नहीं है।

ईडी वर्ष 2020 से धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले की जांच कर रही है। एजेंसी ने उत्तराखंड पुलिस की उस एफआईआर को आधार बनाया है, जो वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में अनियमितताओं से संबंधित थी।

जांच के दौरान ईडी ने हरिद्वार और रुड़की में स्थित सावधि जमा (एफडी), भूमि और शैक्षणिक भवनों सहित 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। यह इस मामले में जारी किया गया छठा कुर्की आदेश है।

ईडी के अनुसार, जांच में छात्रवृत्ति के 6,208 दावों में से 2,895 दावे (46.63 प्रतिशत) फर्जी पाए गए। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थी शामिल थे जो परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे, अनुपस्थित पाए गए, जिनका पता नहीं चल सका या जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसके बावजूद उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ मिलता रहा।

एजेंसी का कहना है कि इस फर्जीवाड़े से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को अवैध आर्थिक लाभ पहुंचा। मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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