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परिजनों ने बताया फर्जी एनकाउंटर, भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने भी उठाए सवाल; सरकार ने न्यायिक जांच के दिए निर्देश

आरा/भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। घटना से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के बाद इस एनकाउंटर की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। बढ़ते विवाद के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है।
घटना 17 जून की है, जब पुलिस भरत भूषण तिवारी को पकड़ने उनके गांव बिलौटी पहुंची थी। इससे पहले भरत ने फेसबुक पर लाइव आकर सरकारी व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जताई थी और एक अधिकारी के “एनकाउंटर” की धमकी दी थी। पुलिस का कहना है कि समझाने के दौरान भरत ने पिस्टल निकाल ली, जिसके बाद मुठभेड़ हुई। वहीं परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि भरत ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने गोली चला दी।
घटना के बाद वायरल हुए वीडियो को लेकर भी विवाद गहरा गया है। परिजनों का कहना है कि वीडियो में भरत पुलिस की ओर पिस्टल फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने सरेंडर कर दिया था।

हालांकि पुलिस का कहना है कि हालात बेहद तनावपूर्ण थे और जवानों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। घायल भरत भूषण को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
एनकाउंटर के बाद भोजपुर समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जबकि राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
इस घटना ने बिहार की राजनीति भी गरमा दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यदि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो उन्हें गोली मारने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार सरकार से उच्चस्तरीय जांच तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अश्विनी चौबे ने अपने बयान में कहा कि यदि वायरल वीडियो में दिख रहा आत्मसमर्पण सही है तो भरत को गिरफ्तार कर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी, न कि गोली मार दी जाती। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया।
बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और भाजपा नेता मिथिलेश तिवारी ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले युवक के आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी लेनी चाहिए थी। उनका यह भी कहना था कि यदि पुलिस कार्रवाई अपरिहार्य थी तो जानलेवा गोली चलाने के बजाय कम घातक विकल्प अपनाए जा सकते थे।
गौरतलब है कि एनकाउंटर से एक दिन पहले पुलिस ने भरत भूषण तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था। ऐसे में अगले ही दिन हुई मुठभेड़ और मौत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक जांच और विभागीय जांच की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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