नैनीताल के अलमा कॉटेज में भारी मालवे में आधा दर्जन लोग दबे।

जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, सेना और विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से परखी आपदा प्रबंधन की तैयारियां

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मल्लीताल स्थित आल्मा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक घटना बनाकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। इस दौरान मलवे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता का परीक्षण किया गया।

रिपोर्ट: भुवन सिंह ठठोला, नैनीताल

भारी बारिश के बीच नैनीताल के मल्लीताल स्थित आल्मा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक सूचना पर जिला प्रशासन ने व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। सुबह 9:11 बजे जिला आपदा परिचालन केंद्र को सूचना मिलने के बाद प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया और विभिन्न विभागों की टीमें मौके पर रवाना कर दी गईं।

मॉक ड्रिल के तहत तहसीलदार अक्षत भट्ट को एरिया इंसिडेंट कमांडर नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग, जल संस्थान, पशुपालन विभाग, जिला पंचायत, 99 माउंटेन ब्रिगेड तथा एनसीसी के 14 कैडेटों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया।

रेस्क्यू टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। अभियान में सैटेलाइट फोन, फोल्डिंग स्ट्रेचर, रोप, हार्नेस, हेलमेट, जुमार, कैरेबिनार, चेन सॉ, आयरन कटर, वुड कटर, फर्स्ट एड किट, ऑक्सीजन उपकरण, एंबुलेंस सहित अन्य आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान मलवे में दबे आठ घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर स्टेजिंग एरिया पहुंचाया गया। यहां चिकित्सा, राहत, भोजन, सहायता एवं मुआवजा केंद्र पहले से स्थापित किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घायलों की प्राथमिक जांच की, जिनमें दो गंभीर घायलों को बी.डी. पांडे अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

इस दौरान 99 माउंटेन ब्रिगेड और एनसीसी कैडेटों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में वे प्रभावी भूमिका निभा सकें।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।

अभ्यास के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया गया कि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रशासन और सभी एजेंसियां तेजी और बेहतर तालमेल के साथ राहत कार्य संचालित कर सकें।

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