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‘सुजाता नृत्यालय’ ने छेड़ी ‘हर घर तिरंगा’ की तान हल्द्वानी के गौरी शंकर काण्डपाल के स्वर और मोहन जोशी की बांसुरी से सजा विशेष गीत

हल्द्वानी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे देश में चलाए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना को अब शास्त्रीय कला के माध्यम से भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हल्द्वानी की प्रतिष्ठित कथक संस्था ‘सुजाता नृत्यालय’ द्वारा इस राष्ट्रीय अभियान को समर्पित एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति तैयार की गई है, जिसमें संस्थान के बाल एवं युवा कलाकार कथक नृत्य के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान का संदेश देंगे।

संस्थान की निर्देशिका एवं प्रख्यात कथक नृत्यांगना सुजाता माहेश्वरी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम की भावना से जोड़ना और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने और राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का एक प्रभावी मंच भी है।

उन्होंने कहा कि आजादी के अमृतकाल में यह आवश्यक है कि युवा पीढ़ी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को समझे तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पहचाने। इसी सोच के साथ सुजाता नृत्यालय के कलाकारों ने कथक की पारंपरिक शैली को देशभक्ति की भावना से जोड़ते हुए यह विशेष प्रस्तुति तैयार की है।

कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए देशभक्ति गीत “हर घर तिरंगा लहराए, घर-घर तिरंगा लहराए” को सांस्कृतिकर्मी एवं शिक्षक गौरी शंकर काण्डपाल ने अपने ओजस्वी स्वर दिए हैं। वहीं, सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक मोहन जोशी ने अपनी मधुर बांसुरी और संगीत संयोजन से गीत को आकर्षक एवं ऊर्जावान स्वरूप प्रदान किया है।

गीत की ताल और लय को कथक नृत्य की शास्त्रीय संरचना के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे कलाकार पदचाप, चक्कर, तिहाइयों और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से देशभक्ति की भावना को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत कर सकें। कथक की पारंपरिक सुंदरता और राष्ट्रभक्ति के संदेश का यह संगम दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।

सुजाता माहेश्वरी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कलाकार तिरंगे की गरिमा, देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त करेंगे। बांसुरी की मधुर धुनों, गीत के प्रेरणादायक शब्दों और कथक की मनोहारी मुद्राओं का यह संयोजन स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को और अधिक भव्य एवं भावनात्मक बनाएगा।

उन्होंने सभी नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस पर अपने घरों में तिरंगा फहराने तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि “हर घर तिरंगा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान, एकता और गर्व की सामूहिक अभिव्यक्ति है।”

यह सांस्कृतिक प्रस्तुति न केवल कला प्रेमियों को आकर्षित करेगी, बल्कि युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

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