नैनीताल दूषित पानी पीने से लोग पीलिया डायरिया जैसी बीमारी फैलने बीमार हो रहे है।
रिपोर्टर : गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। नैनीताल से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। कई गांवों के लोग पिछले कुछ दिनों से लगातार पीलिया, डायरिया, टाइफाइड, उल्टी, बुखार और दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गांवों के दर्जनों लोग अलग-अलग अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार करा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संस्थान ने पेयजल और सीवर लाइनों को अलग करने, टंकियों की सफाई कराने और क्लोरीनेशन का अभियान शुरू कर दिया है।
मामले में जनहित और छात्रहित को देखते हुए मुख्य शिक्षाधिकारी ने ज्यूलिकोट क्षेत्र के पांच सरकारी एवं निजी विद्यालयों में 1 सितंबर से 3 सितंबर तक अवकाश घोषित कर दिया है।
कृष्णापुर-दुर्गापुर समेत कई गांवों में पहले से फैली थी बीमारी
बताया जा रहा है कि नैनीताल के तल्लीताल के निचले क्षेत्र कृष्णापुर और दुर्गापुर से लगे वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़ और छिंडां तल्ला समेत अन्य गांवों में बड़ी संख्या में लोग दूषित पेयजल से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में बड़ी आबादी पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में आई है, जिसके बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई।
मामले के सामने आने के बाद जल संस्थान ने पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराई। जांच के दौरान पानी में सीवेज के मिश्रण की बात सामने आने के बाद विभाग ने सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की। विभागीय स्तर पर पेयजल और सीवर लाइनों की जांच कर उन्हें अलग-अलग करने का काम किया गया तथा जल भंडारण टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन शुरू कराया गया।
ज्यूलिकोट में ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुरू किया धरना
ज्यूलिकोट और आसपास के गांवों में लगातार लोगों के बीमार होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया। सोमवार को ग्रामीणों ने नैनीताल-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है, जिसके कारण लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं।
धरना दे रहे ग्रामीणों ने बताया कि ज्यूलिकोट, वर्गोंमोंट, गांजा, छीड़ा, वीरभट्टी, कृष्णापुर, साडियाताल, तल्ला बेलुवाखान, मल्ला बेलुवाखान और देवलडूंगा समेत कई क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या सामने आ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार दूषित पानी पीने से लोगों में पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, उल्टी, बुखार और दस्त जैसी बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति मुख्य रूप से दुर्गापुर जल स्रोत से की जाती है और इसके आसपास सीवर टैंक से लीकेज की समस्या भी है। उनका कहना है कि पेयजल और सीवेज के आपस में मिलने की आशंका के कारण ही क्षेत्र में बीमारियां फैल रही हैं।
एक दिन में 110 लोगों ने कराई स्वास्थ्य जांच
ग्रामीणों ने दावा किया कि सोमवार को पीएचसी सेंटर गांजा में पेट संबंधी बीमारियों की शिकायत लेकर करीब 110 लोगों ने स्वास्थ्य जांच कराई। लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या को लेकर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और जल संस्थान से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
धरने में बीटीसी सदस्य हिमांशु पांडे और मनोज चनियाल सहित क्षेत्र के कई ग्रामीण शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए।
जल संस्थान ने बनाई टीमें, घर-घर क्लोरीनेशन का अभियान
पेयजल विभाग के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई ने बताया कि समस्या सामने आने के बाद विभाग ने इसके समाधान के लिए टीमें गठित की हैं। विभाग ने सबसे पहले सीवर और पेयजल लाइनों की जांच कर उन्हें अलग-अलग करने की कार्रवाई शुरू की।
उन्होंने बताया कि जल टंकियों की सफाई कराने के बाद उनमें क्लोरीन डाला गया है। इसके साथ ही विभागीय टीमें अब गांवों में घर-घर जाकर पानी की टंकियों में क्लोरीन का छिड़काव कर रही हैं, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
सीडीओ के निर्देश पर 5 स्कूलों में 3 दिन का अवकाश
क्षेत्र में फैल रही बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट ने प्रशासन को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सीडीओ के निर्देश पर मुख्य शिक्षाधिकारी ने छात्रहित और जनहित को देखते हुए ज्यूलिकोट क्षेत्र के पांच सरकारी और निजी विद्यालयों में 1, 2 और 3 सितंबर को अवकाश घोषित कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी क्लोरीनेशन से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पेयजल स्रोतों, पाइपलाइनों और सीवर व्यवस्था की व्यापक जांच कर दूषित पानी की सप्लाई को पूरी तरह रोकने की मांग की है।
क्षेत्र में बढ़ते मरीजों और दूषित पेयजल की शिकायतों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब ग्रामीणों की नजर जल संस्थान, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।










