हल्द्वानी। आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं एवं आरक्षण का लाभ पहुंचाने की मांग को लेकर करणी सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संगठन ने देश में व्यापक, पारदर्शी और अद्यतन सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराने के साथ ही वर्तमान आरक्षण व्यवस्था और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है।
करणी सेना की ओर से 31 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि देश में सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में लगातार बदलाव हो रहा है। ऐसे में सरकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय की नीतियों तथा आरक्षण व्यवस्था का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे अधिक जरूरतमंद और वंचित हैं।
संगठन ने मांग की कि देश में एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराई जाए, जिससे विभिन्न वर्गों की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का स्पष्ट एवं पारदर्शी आकलन किया जा सके। करणी सेना का कहना है कि सही और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर ही सरकारी सहायता और कल्याणकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।
पत्र में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समेत विभिन्न आरक्षित वर्गों को मिलने वाले आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि योजनाओं और सुविधाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद एवं वंचित परिवारों तक पहुंचे।
करणी सेना ने पत्र में यह भी कहा कि सरकारी नीतियों और सहायता योजनाओं में धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचते हुए, आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। संगठन ने आर्थिक कमजोरी को सरकारी सहायता और कल्याणकारी योजनाओं के निर्धारण में एक महत्वपूर्ण आधार बनाए जाने की मांग रखी है।
करणी सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। संगठन का मानना है कि पारदर्शी आंकड़ों और नियमित समीक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान की दिशा में अधिक प्रभावी नीति बनाई जा सकती है।










