भीमताल में दैवीय आपदा की मार से बेहाल अल्चौना का ‘पांडे छोड़’ तोक, घरों में घुसा नाले का मलबा
भीमताल। विकासखंड भीमताल की ग्राम पंचायत अल्चौना के तोक ‘पांडे छोड़’ में अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी। क्षेत्र में मंगलवार दोपहर अचानक मौसम बदलने के बाद पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले बरसाती नाले ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज बहाव के साथ भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया, जिससे कई ग्रामीणों के घरों में पानी और मलबे का सैलाब घुस गया।
आपदा की सूचना मिलने पर भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने विभागीय अधिकारियों के साथ अल्चौना, सौनगांव और चाफी क्षेत्र के प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर आपदा से हुए नुकसान की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया।
बताया गया कि ‘पांडे गांव भांकर’ की ओर से आने वाले बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव बढ़ गया। नाले का तेज प्रवाह अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर नीचे की ओर आया। देखते ही देखते मलबा आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच गया और कई घरों में पानी व कीचड़ भर गया।
घरों का सामान हुआ बर्बाद, प्रभावित परिवारों के सामने संकट
अचानक आई इस आपदा के कारण प्रभावित परिवारों के घरों के भीतर रखा कीमती घरेलू सामान पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गया है। लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने अब रहने और भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार इस तोक में शत-प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) परिवार निवास करते हैं। अधिकांश परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा से उनका सीमित संसाधनों वाला जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की उठाई मांग
घटना के बाद से प्रभावित परिवारों में भय का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस बरसाती नाले ने इस बार भारी तबाही मचाई है, उससे भविष्य में भी उनके घरों और परिवारों की सुरक्षा को खतरा बना रह सकता है।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों का गांव के ही किसी सुरक्षित स्थान पर विस्थापन किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन पर सुरक्षित स्थान पर नए आवास बनाने की अनुमति और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए तो वे अपने परिवारों को खतरे वाले स्थान से हटाकर सुरक्षित ढंग से बसा सकते हैं।
ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि प्रशासन प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कर भविष्य के खतरे का आकलन करे और प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए जल्द ठोस कार्रवाई की जाए।
ब्लॉक प्रमुख ने प्रभावित परिवारों को दिया हरसंभव मदद का भरोसा
आपदा प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने एक-एक कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों का ढांढस बंधाया और अधिकारियों से मौके पर हुए नुकसान का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में वह और उनकी पूरी टीम प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण मेहनत-मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले परिवारों को भारी नुकसान हुआ है। इस गंभीर स्थिति से जिला प्रशासन और शासन के उच्च अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया जाएगा। साथ ही प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिलाने, आवश्यक राशन किट उपलब्ध कराने और सुरक्षित विस्थापन के लिए शासन-प्रशासन से समुचित एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ किया स्थलीय निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान ब्लॉक प्रमुख के साथ ग्राम प्रधान लता आर्य, मुकेश पलड़िया, प्रदीप कुमार, बीटीसी अंकित आर्य, हेमा आर्य, लता पलड़िया, नितेश बिष्ट, प्रेम कुल्याल, संजय कुमार, कुंदन जीना, बृजमोहन बिष्ट, अमित नारायण, धर्मेंद्र जीना, राजस्व निरीक्षक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने ब्लॉक प्रमुख और विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान की मांग की। अब प्रभावित परिवारों की निगाहें जिला प्रशासन और शासन की ओर लगी हैं कि उन्हें नुकसान की भरपाई, राहत सामग्री और भविष्य में सुरक्षित जीवन के लिए समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।










