नैनीताल में मां नैना देवी मंदिर में धूमधाम के साथ मनाई गई भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर के प्रसिद्ध मां नैना देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
जन्माष्टमी को लेकर मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। मां नैना देवी ट्रस्ट के सदस्यों ने मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत मालाओं से आकर्षक ढंग से सजाया। शाम होते ही मंदिर की भव्य सजावट और रोशनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
रात के समय मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रीकृष्ण के भजनों और जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन रहे। तेज बारिश के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
इस दौरान छोटे-छोटे बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। परिजनों ने बच्चों को राधा-कृष्ण की वेशभूषा में सजाकर मंदिर पहुंचाया। कोई कान्हा के रूप में मुकुट और मोरपंख लगाए नजर आया तो कोई हाथ में बांसुरी लिए दिखाई दिया। बच्चों की मनमोहक वेशभूषा ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
रात 12 बजे हुआ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ, मंदिर परिसर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। आरती उतारी गई और इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली।
तीन साल बाद पूरे देश में एक साथ मनाई गई जन्माष्टमी

इस बार जन्माष्टमी पर्व को लेकर एक खास संयोग भी देखने को मिला। करीब तीन साल बाद ऐसा अवसर आया है जब देशभर में जन्माष्टमी एक ही दिन मनाई जा रही है। इससे पहले कई वर्षों में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में जन्माष्टमी अलग-अलग दिनों में मनाई जाती थी। पहाड़ों में यह पर्व एक दिन पहले और मैदानी क्षेत्रों में अगले दिन मनाए जाने की परंपरा देखने को मिलती थी।
बच्चों और महिलाओं में दिखा खास उत्साह
जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में कई दिन पहले से ही उत्साह बना हुआ था। महिलाएं और बच्चे पूजा सामग्री, श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं और मंदिर की सजावट से जुड़ी सामग्री खरीदते नजर आए। वहीं बच्चों के लिए राधा-कृष्ण की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और झूले आदि की खरीदारी को लेकर भी खासा उत्साह रहा।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और जन्मोत्सव से जुड़े आयोजनों में परिवारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तेज बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और देर रात तक मां नैना देवी मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।




