चंपावत/भिंगराड़ा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भिंगराड़ा में आयोजित ऐतिहासिक मेले में आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ रही है। एड़ी देवता के जयकारों से गूंजता भिंगराड़ा और मेले में उमड़ती श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस आयोजन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को बखूबी प्रदर्शित कर रही है।
इस अवसर पर पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु भी भिंगराड़ा पहुंचे और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में सहभागिता की। उन्होंने क्षेत्रवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
हरीश पनेरु ने कहा कि भिंगराड़ा का यह ऐतिहासिक मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय व्यापार, लोक मनोरंजन और क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है। मेले के माध्यम से स्थानीय दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी अपनी आजीविका और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी उत्तराखंड की लोक परंपराओं और मेलों का जीवंत बने रहना हमारी सांस्कृतिक मजबूती का प्रमाण है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, देवी-देवताओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित मेले में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ लोक मनोरंजन के कार्यक्रम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु और पर्यटक मेले का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से भी रूबरू हो रहे हैं।
एड़ी देवता के जयकारों और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंजता भिंगराड़ा इन दिनों पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा हुआ है। मेले में उमड़ रही भारी भीड़ यह साबित कर रही है कि क्षेत्र के लोगों के दिलों में आज भी अपनी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति गहरी आस्था मौजूद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भिंगराड़ा का यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र की पहचान है और इसका आयोजन हर वर्ष लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम करता है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित इस मेले ने एक बार फिर धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुंदर संगम की तस्वीर प्रस्तुत की है।




