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नैनीताल। नैनीताल के बोट हाउस क्लब परिसर के सामने स्थित पार्क में किए जा रहे कथित कंक्रीट निर्माण को लेकर माँ नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल ने एक बार फिर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने जिलाधिकारी को स्मरण पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि पार्क में किया जा रहा कंक्रीट निर्माण सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

व्यापार मंडल ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी पत्र संख्या 1/6/26 के माध्यम से 3 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी को शिकायत भेजी गई थी। इसके बावजूद कथित रूप से निर्माण कार्य पर अब तक कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, जिस पर संगठन ने गंभीर नाराजगी जताई है।

तत्काल निर्माण रोकने और ध्वस्तीकरण की मांग

माँ नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि बोट हाउस क्लब परिसर के सामने स्थित पार्क में चल रहे कंक्रीट निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है तो उसके विरुद्ध ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएं।

व्यापार मंडल का कहना है कि ग्रीन पार्क क्षेत्र में इस प्रकार का निर्माण पर्यावरणीय नियमों और न्यायालयों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के विपरीत है। संगठन ने प्रशासन से पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है।

न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का आरोप

स्मरण पत्र में व्यापार मंडल ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य विभिन्न न्यायिक आदेशों की अवहेलना है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि ग्रीन पार्क और झील के आसपास निर्माण गतिविधियों को लेकर स्पष्ट पर्यावरणीय और न्यायिक प्रतिबंध लागू हैं।

व्यापार मंडल ने विशेष रूप से झील के निकट निर्माण को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से निर्माण की वैधता की जांच करने की मांग की है।

निर्माण की स्वीकृति और खर्च हुई धनराशि की जांच की मांग

व्यापार मंडल ने इस कथित अवैध निर्माण से जुड़े विभागों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई है। संगठन ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण कार्य किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है, इसके लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई और निर्माण पर खर्च होने वाली धनराशि की स्वीकृति किस आधार पर प्रदान की गई।

संगठन ने पूरे मामले की विस्तृत वित्तीय एवं विभागीय जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

2 से 3 दिन में जवाब मांगा, नहीं तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पत्र का संज्ञान लेते हुए आगामी 2 से 3 दिनों के भीतर की गई विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाए।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई अथवा जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापार मंडल उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण लेने को विवश होगा।

व्यापार मंडल ने कहा है कि ऐसी स्थिति में प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के आदेशों की कथित अवहेलना के संबंध में जिम्मेदारी तय कराने के लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस स्मरण पत्र की प्रतिलिपि कुमाऊँ मंडलायुक्त, सचिव मुख्यमंत्री उत्तराखंड तथा अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद नैनीताल को भी भेजी गई है।

अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि संबंधित निर्माण कार्य की वैधता को लेकर जांच होती है तो नैनीताल के संवेदनशील पर्यावरणीय और झील संरक्षण क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय सामने आ सकता है।

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