देहरादून। उत्तराखंड में निजी बाइक और स्कूटी का इस्तेमाल कर फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी सप्लाई और सवारी ढोने का काम करने वाले हजारों युवाओं के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग मोटर वाहन नियमों के खिलाफ है। ऐसे में रैपिडो, जोमैटो, स्विगी और अन्य डोर-टू-डोर डिलीवरी एवं राइडिंग सेवाओं से जुड़े लोगों को अब अपने वाहनों को व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत कराकर कमर्शियल नंबर प्लेट की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।

परिवहन विभाग की सख्ती का सबसे अधिक असर उन युवाओं पर पड़ने की संभावना है, जो अपनी निजी बाइक या स्कूटी के जरिए रोजगार चला रहे हैं। राज्य के कई शहरों में बड़ी संख्या में युवा फूड डिलीवरी, ऑनलाइन ग्रॉसरी सप्लाई और बाइक राइडिंग सेवाओं से अपनी आजीविका कमा रहे हैं।

देहरादून से काशीपुर तक कई शहरों में दिखेगा असर

इस फैसले का असर देहरादून, ऋषिकेश, श्रीनगर, हरिद्वार, नैनीताल, हल्द्वानी, टिहरी, रुद्रपुर, काशीपुर, बाजपुर और सितारगंज समेत कई शहरों में देखने को मिल सकता है।

इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा निजी दोपहिया वाहनों के जरिए विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोर-टू-डोर सेवाओं से जुड़े हुए हैं। अब तक इनमें से अनेक लोग अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए पंजीकृत बाइक और स्कूटी का इस्तेमाल कर कमाई कर रहे थे। परिवहन विभाग के रुख के बाद ऐसे वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक और कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

निजी वाहन से कमाई करना नियमों के खिलाफ: परिवहन विभाग

उत्तराखंड परिवहन विभाग के उपआयुक्त शैलेश तिवारी के अनुसार निजी वाहन का व्यावसायिक इस्तेमाल मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन है।

विभाग का तर्क है कि कमर्शियल श्रेणी में पंजीकृत वाहन संचालकों को टैक्स, परमिट, फिटनेस और अन्य निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में यदि निजी नंबर प्लेट वाले वाहनों को भी उसी तरह व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने की छूट दी जाए, तो नियमों का पालन करने वाले कमर्शियल वाहन मालिकों के साथ असमानता पैदा होती है।

इसी वजह से परिवहन विभाग अब ऐसे मामलों में सख्ती करने की तैयारी में है और व्यावसायिक उद्देश्य से इस्तेमाल होने वाले वाहनों को नियमानुसार कमर्शियल श्रेणी में लाने पर जोर दे रहा है।

डिलीवरी और राइडिंग करने वाले युवाओं की बढ़ी चिंता

इस फैसले से सबसे ज्यादा चिंता डिलीवरी और राइडिंग का काम करने वाले युवाओं में देखी जा रही है। उनका कहना है कि पहले से ही पेट्रोल के बढ़ते खर्च, वाहन की मरम्मत, सर्विसिंग और अन्य खर्चों के कारण उनकी वास्तविक बचत सीमित है।

डिलीवरी बॉय राजकुमार गुप्ता के अनुसार महीने भर मेहनत करने के बाद उनकी कुल कमाई करीब 25 हजार रुपये तक पहुंचती है। इसमें पेट्रोल, वाहन मेंटेनेंस और अन्य खर्च निकालने के बाद करीब 17 हजार रुपये ही बच पाते हैं।

उनका कहना है कि यदि अब कमर्शियल नंबर प्लेट लेने, वाहन का व्यावसायिक पंजीकरण कराने और उससे जुड़े अतिरिक्त खर्च भी उठाने पड़ेंगे तो इस काम से होने वाली बचत और कम हो जाएगी। इससे कई युवाओं के लिए डिलीवरी या राइडिंग सेवा को रोजगार के रूप में जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

कमाई के साधन और नियमों के बीच संतुलन बड़ी चुनौती भी

उत्तराखंड में ऑनलाइन डिलीवरी और राइडिंग सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। खासकर बेरोजगारी और सीमित रोजगार के अवसरों के बीच बड़ी संख्या में युवा निजी बाइक और स्कूटी के माध्यम से इन प्लेटफॉर्म से जुड़कर अपनी आय का साधन बना रहे हैं।

अब परिवहन विभाग की सख्ती के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि निजी वाहन से रोजगार कर रहे युवाओं को कमर्शियल श्रेणी में वाहन बदलने या पंजीकरण कराने में कितना अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा और इस प्रक्रिया को उनके लिए कितना आसान बनाया जाएगा।

आने वाले दिनों में परिवहन विभाग की कार्रवाई और इस संबंध में जारी होने वाले स्पष्ट दिशा-निर्देशों पर हजारों डिलीवरी पार्टनर्स और राइडिंग सेवा से जुड़े युवाओं की नजर रहेगी। यदि नियमों को सख्ती से लागू किया गया तो राज्य के कई शहरों में फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी सप्लाई और बाइक राइडिंग सेवाओं से जुड़े लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है।

मुख्य बातें

सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नियमों के खिलाफ।

डिलीवरी और राइडिंग सेवाओं के लिए कमर्शियल श्रेणी में पंजीकरण पर जोर।

देहरादून, हल्द्वानी, नैनीताल, हरिद्वार, काशीपुर, रुद्रपुर समेत कई शहरों में पड़ सकता है असर।

टैक्स, परमिट और फिटनेस नियमों में समानता लाने के लिए विभाग की सख्ती।

अतिरिक्त खर्च को लेकर डिलीवरी और राइडिंग करने वाले युवाओं में बढ़ी चिंता।

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